Rajasthan News: राजस्थान में सोमवार को सदन में प्रशनकाल के दौरान प्रदेश में लोगों के लिए खतरा बन रहे आवारा कुत्तों का मुद्दा उठाया गया है. ,जहां विधायकों ने कुत्तों के हमलों से आमजन, विशेषकर बच्चों और युवाओं को होने वाली असुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की. सात ही सराकार को इसके प्रति गंभार रुख अपनाने की बात कही.
नियम 295 के तहत उठाया मुद्दा
कोटा दक्षिण से विधायक संदीप शर्मा ने नियम 295 के तहत डॉग बाइट्स के मद्दे को सदन के पटल पर रखा. उन्होंने कहा कि प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग घरों से बाहर निकलने में डरने लगे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है.
बच्चे और फूड डिलीवरी बॉय सबसे ज्यादा निशाने पर
विधायक शर्मा ने सदन का ध्यान उन घटनाओं की ओर खींचा जहां मासूम बच्चे इन कुत्तों का आसानी से शिकार बने हैं. उन्होंने कहा कि आवारा कुत्ते हर उम्र के व्यक्ति के लिए खतरा हैं, लेकिन छोटे बच्चे इनके लिए सबसे आसान शिकार साबित हो रहे हैं. आए दिन बच्चों पर जानलेवा हमले की खबरें सामने आ रही हैं, जो समाज और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है. इसके साथ ही उन्होंने कामकाजी युवाओं की समस्या भी उठाई। उन्होंने बताया कि रात के समय शहरों में फूड डिलीवरी करने वाले युवक अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, क्योंकि सड़कों पर कुत्तों का उन पर झपट्टा मारना अब एक सामान्य और डरावनी घटना बन चुकी है.
अदालत की सख्ती और नसबंदी की मांग
संदीप शर्मा ने इस दौरान न्यायिक टिप्पणियों का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि माननीय अदालतें भी बढ़ते डॉग बाइट के मामलों पर अपनी गंभीर चिंता जाहिर कर चुकी हैं. प्रशासन की ओर से की जा रही मौजूदा कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है. विधायक ने सरकार के सामने प्रमुख रूप से ये मांगें रखीं है जिसमें उन्होंने कहा है कि पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों की नसबंदी कराई जाए. साथ ही कुत्तों की बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने के लिए प्रभावी और दूरगामी परिणामों का विचार कर नियंत्रण नीति बनाई जाए. इसके अलावा घायलों और पीड़ितों के त्वरित इलाज के लिए नगर निकायों को पाबंद किया जाए.