Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा का सदन बीते शुक्रवार की तरह आज (सोमवार) को भी हंगामेदार रहा. सदन में प्रश्न काल के दौरान स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों और शिक्षकों की कमी को लेकर पूछे गए विपक्ष के सवालों पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. बीजेपी के अलवर से विधायक महंत बालकनाथ के जरिए उठाए गए एक सवाल ने सदन में पिछली और वर्तमान सरकार की शिक्षा नीतियों पर बहस छेड़ दी.
महंत बालकनाथ ने उठाया शिक्षकों की कमी का मुद्दा
सदन में अलवर के तिजारा विधायक महंत बालकनाथ ने प्रदेश के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों की बदहाली का मुद्दा उठाया. उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इन महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से पूछा कि इन रिक्त पदों को भरने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे है?
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का पिछली सरकार पर निशाना
महंत बालकनाथ के सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पिछली कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए कई स्कूलों को आनन-फानन में अंग्रेजी माध्यम में बदल दिया, लेकिन वहां जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की. इनमें से कई स्कूलों में ऐसे शिक्षक लगा दिए गए जो अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हुए नहीं थे. मंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार इन खामियों को दूर कर रही है. इसके लिए स्कूलों में नए पद सृजित किए गए हैं और अब इंटरव्यू के माध्यम से शिक्षकों का चयन किया जा रहा हैं. साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि फिलहाल सरकारी स्कूलों में बस सुविधा शुरू करने का सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है.
भांग वाले बयान पर जूली और दिलावर के बीच तीखी झड़प
बहस के दौरान माहौल तब अधिक गरमा गया जब मंत्री मदन दिलावर ने स्कूलों के युक्तिकरण पर बात की. उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में छात्रों की संख्या न के बराबर है. उन्होंने उदाहरण दिया कि जोधपुर में एक ऐसा स्कूल भी है जहां एक भी छात्र नहीं है. इसी दौरान उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भांग खाकर विद्यालय खोल दिए थे. इस टिप्पणी पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़ा ऐतराज जताया और पलटवार करते हुए कहा कि जवाब आप भांग खाकर दे रहे हैं. जूली ने सवाल उठाया कि क्या 20 बच्चों वाले स्कूल में छात्रों को शिक्षा का अधिकार नहीं है? क्या कम संख्या होने पर उन्हें शिक्षा से वंचित कर दिया जाएगा?
विपक्ष ने रखा अपना पक्ष
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल, दोनों ही राज्य के गरीब बच्चों के लिए वरदान साबित हुए हैं. उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सरकार के दौरान महात्मा गांधी स्कूलों के लिए लगभग10 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई थी. वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने स्पष्ट किया कि स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल वास्तव में केंद्र सरकार की योजना के तहत खोले गए थे, इसलिए उन पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है.
शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने में सरकार प्रतिबद्ध
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने में लगातार लगी हुई है. उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और जहां स्कूलों में छात्रों की संख्या बेहद कम है, वहां संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा.
यह भी पढ़ें; राजस्थान में पेंशन पर खुशखबरी, भजनलाल सरकार ने बढ़ाया पैसा; अब हर महीने मिलेंगे इतने रुपये