Jaipur News: मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) धांधली मामले में सीबीआई की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है. राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित एसओजी (SOG) दफ्तर में हलचल तेज है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई की टीम ने लंबी पूछताछ के बाद गुरुग्राम से यश यादव को हिरासत में लिया और उसे जयपुर लेकर आई है. जांच एजेंसी का दावा है कि गिरफ्तार किए गए दो भाई, दिनेश और मांगीलाल, सीधे तौर पर यश यादव के संपर्क में थे और उन्होंने उसी से पेपर खरीदा था. अब सीबीआई इन तीनों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर रही है ताकि पेपर सिंडिकेट के पूरे रूट का खुलासा हो सके.
'पेपर होता तो घर के चारों बच्चे पास होते'
जब इस मामले की तहकीकात के लिए NDTV की टीम जमवारामगढ़ स्थित दिनेश और मांगीलाल के घर पहुंची, तो वहां का नजारा कुछ अलग ही था. दो मंजिला आलीशान मकान में रहने वाले इस संपन्न परिवार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. मांगीलाल की पत्नी सोनू देवी ने अपनी बातें सामने रखी. उन्होंने बताया कि उनके परिवार के 4 बच्चों ने पिछली बार नीट परीक्षा दी थी, लेकिन अगर उनके पास वास्तव में पेपर होता, तो चारों सफल होते. हकीकत यह है कि केवल दो बच्चे ही पास हो पाए और उनकी रैंक भी इतनी अच्छी नहीं थी कि उन्हें बहुत अच्छा कॉलेज मिल सके.
सोनू देवी ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं प्रकृति, अमन और विकास. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में प्रकृति और विकास का नीट में चयन तो हो गया था, लेकिन रैंक कम आने की वजह से उन्हें मैनेजमेंट कोटे से एडमिशन दिलाना पड़ा. सोनू देवी के मुताबिक इसके लिए बच्चों ने करीब पाँच साल तक लगातार तैयारी की थी. उन्होंने बताया कि उनका बेटा अमन भी इस बार नीट परीक्षा में शामिल हुआ था. अमन सीकर में रहकर तैयारी कर रहा था, और वह दिनेश के बेटे ऋषि के साथ ही पढ़ाई करता था.
'बेटे की जानकारी भी नहीं दे रही पुलिस'
आरोपी दिनेश की पत्नी रजनी ने भी अपने पति को बेगुनाह बताया है. उन्होंने कहा कि उनके पति का भाजपा या किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है. रजनी ने चिंता जताते हुए बताया कि उनका बेटा ऋषि, जो सीकर में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था, सोमवार से उसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है. परिवार का कहना है कि उन्हें कानून पर भरोसा है, लेकिन उनके बेटों को किसी गहरी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है.
वहीं, दिनेश की मां प्रभु देवी के अनुसार, उनके बेटे मेहनत और ईमानदारी से अपना जीवन यापन कर रहे थे और वे ऐसा कोई अपराध नहीं कर सकते.
कड़ी से कड़ी जोड़ रही सीबीआई
जांच में यह भी सामने आया है कि दिनेश का अक्सर सीकर आना-जाना लगा रहता था, जहां उसका बेटा ऋषि पढ़ाई कर रहा था. एजेंसी को शक है कि ऋषि के जरिए ही पेपर 'राकेश' नाम के शख्स तक पहुंचा था. इसके बाद इस लीक पेपर को करीब 1,000 छात्रों के बीच सर्कुलेट किया गया. जहां दिनेश राजनीति में रुचि रखता था, वहीं मांगीलाल प्रॉपर्टी के काम में सक्रिय था. एसओजी और सीबीआई अब इन्हीं कड़ियों को जोड़ रही हैं कि एक प्रॉपर्टी डीलर और राजनीतिक संपर्क वाले व्यक्ति के पास पेपर लीक का इतना बड़ा नेटवर्क कैसे पहुंचा.
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