'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट' सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले अजमेर दरगाह के नसीरुद्दीन चिश्ती और अंजुमन सैयद

सुप्रीम कोर्ट ने'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991' के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा है कि जब तक इस मामले पर केंद्र सरकार का जवाब दाखिल नहीं हो जाता, तब तक इस पर सुनवाई नहीं होगी.

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ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह अजमेर.

Places of Worship Act News: राजस्थान के अजमेर शहर की ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चा का विषय बनी हुआ है. इस मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991' के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की. जिसमें कोर्ट ने मंदिर-मस्जिद से जुड़े नए मुकदमे दाखिल करने पर रोक लगा दी.

इसके साथ ही सर्वे पर भी स्टे लगा दिया. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से चार हफ्तों में जवाब मांगा है. वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के नसीरुद्दीन चिश्ती और खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती का बयान सामने आया है. 

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सुप्रीम कोर्ट फैसले पर नसीरुद्दीन चिश्ती बयान 

नसीरुद्दीन चिश्ती ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के लिए सभी वकीलों को मैं धन्यवाद देता हूं. आज के फैसले से लोगों का विश्वास न्याय प्रक्रिया में और मजबूत होगा. कोर्ट ने 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट; पर आदेश दिया है कि निचली आदलतों में जो दाबे पेश किये जा रहे थे उनको बढ़ावा नहीं दिया जाए. इसके साथ ही पुराने जो मामले चल रहे हैं उनमें कोई आदेश पारित ना किया जाए और ना ही किसी सर्वे के आदेश पारित किये जाए. यह बहुत खुशी की बात है कि आज इस प्रकार से आदेश पारित हुआ है. यह उन लोगों के लिए चिंता की बात है जो चीप पब्लिसिटी के लिए ऐसी हरकर करते थे. 

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सुप्रीम कोर्ट फैसले पर अंजुमन सैयद बयान

वहीं अंजुमन सैयद जादगान ने कोर्ट ने फैसले पर कहा कि यह एक स्वागत करने वाला फैसला है. वहीं वापिस से न्यायपालिका में हम लोगों का विश्वास बहाल हुआ है. जिस तरह से निचली आदलतों से फैसले आ रहे थे. उन्होंने न्याय पर बहुत सवाल खड़े कर दिए थे. हमारी कोर्ट में आस्था होती है कि वहां से हमे न्याय मिलेगा.

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जिस तरह से निचली आदलतों में हुआ था कि एक ही दिन में सर्वे लिए चल गया. हद तो तब हुई जब ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर सवाल उठे जो विश्व में भारत की अखंडता को प्रोमोट करती है.वहां के मामले को कोर्ट में दाखिल कर लिया गया. जिससे करोड़ों दिलों को ठेस पहुंची. इसके बाद यह गरीब नवाज की रहमत है कि  यह मामला इस तरफ आ गया.

सुप्रीम कोर्ट का वर्शिप एक्ट पर बयान

सुप्रीम कोर्ट ने'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991' के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा है कि जब तक इस मामले पर केंद्र सरकार का जवाब दाखिल नहीं हो जाता, तब तक इस पर सुनवाई नहीं होगी, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है. जिसके बाद सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जवाब जल्द दाखिल किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक नई याचिका दायर की जा सकती है, लेकिन उन्हें रजिस्टर नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उस मांग को ठुकरा दिया है. जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की अलग-अलग अदालतों में इससे जुड़े जो मामले चल रहे है उनकी सुनवाई पर रोक लगाई जाए.

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