जेल के कैदियों को मिलेगा साफ पानी और कपड़े धोने की व्यवस्था, हाई कोर्ट ने राजस्थान सरकार को दिए निर्देश

कोर्ट ने जेलों में साफ पानी, पर्याप्त जलापूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा, महिला कैदियों व किशोर बंदियों की जरूरतें विशेष हैं.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
प्रतीकात्मक फोटो AI

Rajasthan High Court: देश में एक ओर पहले ही साफ पानी का मुद्दा गरमाया हुआ है. वहीं राजस्थान की जेलों में कैदियों को साफ पानी न मिलने की व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है. इस मामले में सुनवाई करते हुए, राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य की जेलों में कैदियों को पीने के पानी, कपड़े धोने की सुविधा और स्वच्छता-स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कमी पर गहरी चिंता जताई. वहीं हाई कोर्ट ने चिंता जताते हुए सरकार को तत्काल नीति बनाने के निर्देश दिए हैं.

जस्टिस अनूप ढंढ की एकलपीठ ने पीपल्स वॉच राजस्थान की याचिका पर यह फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि राजस्थान जैसे गर्म और शुष्क प्रदेश में कैदियों को सप्ताह में केवल एक बार कपड़े धोने की अनुमति देना कल्पना से परे है. ऐसी स्थिति में स्वच्छता और स्वास्थ्य कैसे संभव?

कोर्ट ने क्या टिप्पणी की

कोर्ट ने जेलों में साफ पानी, पर्याप्त जलापूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा, महिला कैदियों व किशोर बंदियों की जरूरतें विशेष हैं. मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता, पर्याप्त पानी, सुरक्षित शौचालय और गोपनीयता अनिवार्य है. इनके अभाव से स्वास्थ्य और गरिमा दोनों प्रभावित होते हैं.

जेल में केवल कागजी सुधार नहीं

अदालत ने जोर दिया कि जेल सुधार केवल कागजी नहीं रहने चाहिए. मॉडल प्रिजन एक्ट-2023 और राजस्थान प्रिजन नियम-2022 का ईमानदार क्रियान्वयन आवश्यक है. स्वच्छता, स्वास्थ्य और पानी संवैधानिक अधिकार हैं. बिना न्यूनतम मानवीय गरिमा के न्याय व्यवस्था अधूरी है.

Advertisement

ये निर्देश दिए गए

  • सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व डीएलएसए सचिव तीन सप्ताह में जेलों का औचक निरीक्षण कर कैदियों से बातचीत के बाद रिपोर्ट दें.
  • प्रत्येक जिले में शिकायत निवारण समिति बनेगी- इसमें जिला मजिस्ट्रेट, जिला जज, सीजेएम, सामाजिक कल्याण अधिकारी, जेल अधीक्षक व डीएलएसए सचिव शामिल होंगे.
  • राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव आदेशों की निगरानी कर रिपोर्ट पेश करें.

यह भी पढ़ेंः पोक्सो कोर्ट ने एक ही आरोपी को सुनाई 3 साल-5 साल और 20 साल की कठोर सजा, जानें क्या है पूरा मामला