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राजस्थान: बस का न फिटनेस, न परमिट, न ही पॉल्यूशन... पुष्कर बस हादसे में हुई की मौत का जिम्मेदार कौन?

बस का परमिट 31 जुलाई 2024 को समाप्त हो गया और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट 10 मई 2025 को समाप्त हो चुका है.  अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक्सपायर दस्तावेजों के बावजूद यह बस सड़कों पर कैसे दौड़ रही थी और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी.

राजस्थान: बस का न फिटनेस, न परमिट, न ही पॉल्यूशन... पुष्कर बस हादसे में हुई की मौत का जिम्मेदार कौन?

अजमेर जिले के पुष्कर की नौसर घाटी में हुई बस दुर्घटना में 2 महिलाओं की मौत हो गई है, जबकि 30 लोग हादसे में घायल हुए हैं. हादसा पुष्कर से करीब 3 किलोमीटर पहले हुआ. यात्रियों का कहना है कि अचानक बस ड्राइवर के नियंत्रण से बाहर हो गई. जो खाई में गिर गई. गुर्जर समाज के लोग मायरा भरने जा रहे थे. बस पलटी तो यही लगा क‍ि अब हम नहीं बचेंगे. भगवान का नाम ही मुंह से न‍िकल रहा था. हादसे के बाद पुष्कर घाटी में लंबा जाम लग गया है. इस दुर्घटना के बाद जो जानकारी जानकारी सामने आई है, उसने परिवहन विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

बिना फिटनेस के दौड़ रही थी बस 

पुष्कर घाटी में 150 फीट की खाई में गिरी बस बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के चल रही थी. परिवहन विभाग भी इससे अनजान बना रहा और बस संचालक नियम कानून की धज्जियां उड़ाकर बस को चलाता रहा है. बस (RJ 19 PA 9932) की जांच में सामने आया कि उसका फिटनेस 31 मार्च 2026 में ही समाप्त हो चुका था.

जुलाई 2024 में खत्म हो चुका था परमिट 

इसके साथ ही बस का परमिट 31 जुलाई 2024 को समाप्त हो गया और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट 10 मई 2025 को समाप्त हो चुका है. आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, किसी भी कमर्शियल वाहन के लिए फिटनेस, परमिट और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट अनिवार्य दस्तावेज होते हैं.

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फिटनेस सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि वाहन तकनीकी रूप से सुरक्षित है और सड़क पर चलने लायक है. यदि फिटनेस समाप्त हो जाती है, तो वाहन को सड़क पर चलाना कानूनन अपराध है, क्योंकि इससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है. वहीं, परमिट वाहन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रियों या सामान के परिवहन की वैध अनुमति देता है. बिना वैध परमिट के बस का संचालन पूरी तरह अवैध माना जाता है.

इसके अलावा, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट यह दर्शाता है कि वाहन से निकलने वाला धुआं निर्धारित मानकों के भीतर है, जिससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर न पड़े. विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीनों दस्तावेजों की अनदेखी सीधे तौर पर हादसों की आशंका को बढ़ाती है. पुष्कर घाटी का यह हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि नियमों की अनदेखी न केवल गैरकानूनी है, बल्कि जानलेवा भी हो सकती है. अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक्सपायर दस्तावेजों के बावजूद यह बस सड़कों पर कैसे दौड़ रही थी और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी.

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