राजस्थान में निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस के टिकट बंटवारे के बाद अब पार्टी के अंदर ही सवाल उठ रहे हैं. 309 नगर निकायों के 10 हजार से ज्यादा वार्डों में प्रत्याशी चयन के लिए कांग्रेस ने करीब एक महीने तक रायशुमारी की. पर्यवेक्षक लगाए गए. जिला स्तर पर पैनल तैयार हुए. नेताओं और कार्यकर्ताओं से राय ली गई.
टिकट बंटने के बाद आरोप लग रहे हैं कि पूरी कवायद आखिरकार विधायकों की पसंद के आगे बेअसर साबित हुई. खासकर जहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं, वहां उनके समर्थकों को टिकट मिलने के आरोप हैं. विधानसभा चुनाव हारे प्रत्याशियों के क्षेत्रों में भी सीनियर नेताओं का दखल ज्यादा दिखाई दिया.
जिला कमेटियों से पैनल मांगे गए
निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने टिकट चयन के लिए लंबी कवायद की. जिला कमेटियों से पैनल मांगे गए. रायशुमारी कराई गई. पर्यवेक्षकों ने ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की. दावा था कि स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर प्रत्याशियों का चयन होगा, लेकिन टिकट बंटने के बाद कई जगह विधायकों की पसंद को तवज्जो मिलने के आरोप लगे.
विधायकों के समर्थकों को टिकट मिलने का दावा
विधायकों के समर्थकों और पसंदीदा दावेदारों को टिकट मिलने की शिकायतें सामने आईं. कुछ जगह विधायक दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे. जयपुर में भी टिकट वितरण के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी सामने आई.
नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई
मालवीय नगर से विधानसभा चुनाव लड़ चुकीं अर्चना शर्मा, बगरू से विधानसभा प्रत्याशी रहीं गंगा देवी और हवामहल से कांग्रेस प्रत्याशी रहे आरआर तिवाड़ी. इन नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई. आरआर तिवाड़ी ने आरोप लगाया कि उन्हें हराने वालों को टिकट दिया गया.
दूसरी तरफ कांग्रेस टिकट वितरण को पारदर्शी और सामूहिक प्रक्रिया बता रही है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने टिकट वितरण में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया. डोटासरा ने माना कि टिकट नहीं मिलने से कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी है.
नाराज नेताओं मनाएंगे डोटासरा
उन्होंने कहा कि राजनीति में 100 प्रतिशत परफेक्ट पैमाना नहीं हो सकता. योग्य व्यक्ति का टिकट छूटने पर नाराज होना स्वाभाविक है. डोटासरा ने नाराज नेताओं से बात कर उन्हें मनाने और उनका सम्मान बनाए रखने की बात कही. उनके मुताबिक टिकट चयन में जिलाध्यक्षों के साथ मंडल, ब्लॉक और कोऑर्डिनेटर को भी शामिल किया गया. पार्टी का दावा है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा टिकट युवाओं को दिए गए, लेकिन टिकट वितरण के बाद कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं.
चुनाव लड़ने की तैयारी में बागी
जयपुर से लेकर दूसरे जिलों तक नाराजगी सामने आ रही है. कहीं टिकट को लेकर विरोध है, तो कहीं बागी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके हैं. अब निकाय चुनाव के नतीजे सिर्फ उम्मीदवारों की जीत-हार तय नहीं करेंगे. बल्कि, यह भी बताएंगे कि कांग्रेस की महीनेभर चली रायशुमारी और टिकट चयन की पूरी कवायद जमीन पर कितनी कारगर रही.
यह भी पढ़ें: नाहरगढ़ में बाघ ने महिला को मार डाला, 'शिवाजी' के हमले से बायोलोजिक पार्क में मचा हड़कंप