Tikaram Jully vs Jogaram Patel: राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार (30 जनवरी) को एसआईआर के मुद्दे पर बयानबाजी देखने को मिली. कांग्रेस के विधायक जाकिर हुसैन गैसावत ने मकराना विधानसभा क्षेत्र में 14 से 19 दिसंबर के बीच प्राप्त फॉर्म-7 में फर्जीवाड़े की बात कही. विधायक ने सूची छिपाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने का मुद्दा उठाया तो संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने आपत्ति जाहिर की. इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री व नेता प्रतिपक्ष में तीखी नोक-झोंक हुई. हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने के बारे में विधि विशेषज्ञों की राय के बाद फैसला लेंगे.
मंत्री की आपत्ति- यह सरकार का विषय नहीं
संसदीय कार्यमंत्री मंत्री पटेल ने कहा कि विधायक ने पर्ची के जरिए उठाने के लिए जो विषय रखा है, वह विषय नियमों व कायदे से सदन में रखा ही नहीं जा सकता. क्योंकि यह न तो राजस्थान सरकार का विषय है और न ही राजस्थान सरकार से जुड़ा कोई विषय है. मंत्री पटेल ने कहा, "संविधान के अनुच्छेद-324 के तहत निर्वाचक नामावली से जुड़े काम निर्वाचन आयोग के अधीन आते हैं. मतदाता सूची बनाना, उसमें संशोधन, नाम जोड़ना या काटना ये सारे अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है. यह राज्य सरकार की विषय वस्तु में नहीं आता है और जो विषय राज्य सरकार का नहीं है, उसे किसी भी तरह से विधानसभा में उठाया नहीं जा सकता."
जूली भी बोले- सरकार जांच कराए
इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि जब मामला पर्ची के माध्यम से उठ गया है और सदन के अध्यक्ष की अनुमति से उठ गया तो संसदीय मंत्री कौन से नियमों की बात कर रहे हैं. जूली ने कहा, ''हम तो पर्ची के माध्यम से यह पूछ रहे हैं कि जो आवेदन आए, वे कहां से आए और उसकी जांच होगी या नहीं? हम तो चाहते हैं कि सरकार उसकी जांच करवा ले.''
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