ओरण भूमि को लेकर भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला, भाजपा नेता बोले- जरूरत पड़ी तो प्राण त्याग दूंगा

ओरण राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग को लेकर वीरेंद्र सिंह ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि प्रशासन ने तीन महीने में ओरण गोचर रिकॉर्ड में दर्ज करने की कार्रवाई करने का आश्वासन देकर धरना उठवाया. लेकिन निर्धारित समय से लेकर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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ओरण बचाने को लेकर पदयात्रा

Rajasthan News: ओरण भूमि को लेकर राजस्थान की भजनलाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सीएम भजनलाल के नेतृत्व में जैसलमेर में हजारों बीघा जमीन को ओरण भूमि के रूप आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है. यह ओरण संरक्षण की दिशा में प्रदेश सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है. उधर ओरण, गोचर और नाड़ी के संरक्षण को लेकर जारी आंदोलन के समर्थन में भाजपा नेता व सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने गुरुवार को जिला कलेक्टर प्रताप सिंह को जिले की ओरण तालाब नाडी, आगोर, गोचर व पशु चारागृह पारम्परिक सामुदायिक भूमि मार्ग के संरक्षण और राजस्व रिकार्ड में पंजीकरण हेतू शांतिपूर्ण भूख हडताल की सूचना देकर अनुमति मांगी है.

ओरण को लेकर सरकार का फैसला

  • देगराय ओरण भीमसर में 5,882 बीघा भूमि सुरक्षित  
  • बिंजोता ओरण की 597 बीघा भूमि आरक्षित
  • स्वांगिया माता ओरण पूनमनगर में 3,607 बीघा शामिल
  • आलाजी ओरण दिलावर गांव व कुछड़ी में 7,473 बीघा सुरक्षित 
  • कुल 17,561 बीघा ओरण भूमि को मिली मान्यता

'पदयात्रा के समर्थन में भूख हड़ताल करूंगा'

ओरण राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग को लेकर वीरेंद्र सिंह ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि प्रशासन ने तीन महीने में ओरण गोचर रिकॉर्ड में दर्ज करने की कार्रवाई करने का आश्वासन देकर धरना उठवाया. लेकिन निर्धारित समय से लेकर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसको लेकर पर्यावरण प्रेमी नगे पैर पदयात्रा कर रहे हैं. उन्होने कहा कि अगर यह पदयात्रा जैसलमेर की सीमा में तब तक अगर ओरण रिकॉर्ड दर्ज नहीं हुई और यात्रा जोधपुर में प्रवेश कर जाती है तो मैं उनके समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठ जाऊंगा. 

"हदय रोग के चलते में पैदल नहीं चल सकता, लेकिन हम सब का कर्तव्य है, उनका साथ देना. पिछली सरकार से उन्हें उम्मीद नहीं थी, लेकिन अब उनकी पार्टी की सरकार है और उम्मीद है कि सुनवाई होगी. मैं पार्टी के खिलाफ नहीं हूं. मैं तो उन्हे याद दिलाने की कोशिश कर रहा हूं."

पिछली सरकार से 5 साल व इस सरकार से 2 साल 2 महीने से बातचीत कर ली. दोनों विधायक भी लगे हुए हैं. ओरण दर्ज होनी चाहिए. इतना ही नहीं,  उनका कहना है कि इन सब जतनो के बावजूद अगर यह पदयात्रा जोधपुर से जयपुर क्षेत्र की तरफ बढ़ गई तो जल त्याग दूंगा और जयपुर पहुंच जाने के बाद भी मांग नहीं मानी और जरूरत पड़ी तो प्राण भी त्याग दूंगा. 

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