Jaisalmer Oran Paidal yatra: राजस्थान के जिले जैसलमेर में 'टीम ओरण' लगातार पैदल मार्च कर रही है, जिसमें गोचर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की जा रही है. बुधवार को यह मार्च देर शाम जैसलमेर जिले के लाठी पहुंचा. इस दौरान समाज के सभी वर्गों के सैकड़ों लोगों ने मार्च करने वालों का माला पहनाकर और उन पर फूल बरसाकर भव्य स्वागत किया. 'टीम ओराण' का यह मार्च ओरान, तालाबों और कैचमेंट समेत पर्यावरण से जुड़े अलग-अलग मुद्दों को लेकर है.
31 जनवरी तक जयपुर पहुंचेगी ओरण ओरण बचाओ पदयात्रा
पर्यावरणविद सुमेर सिंह सांवता ने जिले के जंगल और पर्यावरण के मुद्दों को लेकर सरकार को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सरकार हमारे सब्र का इम्तिहान न ले... उसे विकास करना चाहिए, विनाश नहीं. अगर जल्द ही कोई फैसला नहीं लिया गया तो हम जयपुर पहुंचकर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन करेंगे. आपको बता दें कि तनोट राय माता मंदिर से शुरू हुई यह 'ओरण बचाओ पदयात्रा' 725 किलोमीटर का सफर तय करके 31 जनवरी तक जयपुर पहुंचेगी.
सरकार को दी चेतावनी,गंभीर नतीजे भुगतने होंगे
टीम के एक और सदस्य भोपाल सिंह झलोड़ा ने सुमेर सिंह की बात दोहराते हुए कहा कि सरकार हमारे सब्र का इम्तिहान न ले. हमारा समर्थन पूरा और साफ है.जिस भूमि के संरक्षण के लिए हमने कुर्बानी दी है, उसे कंपनियों को देकर हम रेगिस्तान की शांति खराब नहीं होने देंगे. उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर सरकार जैसलमेर में ओरण-गोचर भूमि आरक्षित नहीं करती है, तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे.
कैसे सुलगी ये आग
टीम ओरण का साथ देने वाले महंत प्रतापपुरी महाराज ने बताया कि तीन महीने पहले जैसलमेर कलेक्टर के ऑफिस के बाहर 34 दिन तक इस विषय को लेकर धरना दिया गया था. उसमें जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर ने भरोसा दिलाया था कि जिले की ओरण, नाड़ि समेत सभी चीजें राजस्थान के राजस्व में रजिस्टर्ड होंगी, लेकिन अब तीन महीने बीत चुके हैं और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इसके लिए यह ओरण यात्रा तनोंट राय माता मंदिर से जयपुर तक पैदल शुरू की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि यह पदयात्रा तब तक जारी रहेगी जब तक जैसलमेर के ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड नहीं हो जाता.
30 किलोमीट रोजाना पैदल चलती है टीम ओरण
बुधवार को लाठी में रुकने के बाद, टीम ओरण ने देवी-देवताओं को याद करते हुए भजन-कीर्तन किए और रात में आराम करने के बाद, टीम अगले दिन 30 किलोमीटर पैदल चलने के लिए तैयार हुई. यह टीम सूरज उगते ही, जिले के लोगों का कारवां 'जय तनोट राय' के नारे के साथ चलना शुरू कर देता है. 'टीम ओरण' की यह पदयात्रा ओरण, चारागाह, तालाब, कैचमेंट समेत पर्यावरण के अलग-अलग मुद्दों को लेकर है. सूरज उगने के साथ शुरू होने वाली यह यात्रा शाम तक गांव में किसी मंदिर या किसी जगह पर रुकती है. युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग हक की लड़ाई के बीच एक दरी पर दिखे.
यह भी पढ़ें; Rajasthan Live: राजस्थान विधानसभा में आज राज्यपाल के अभिभाषण पर होगी बहस, सदन के हंगामेदार रहने के आसार