जयपुर ITAT रिश्वतकांड में CBI को मिला अहम सुराग, वकील की डायरी... न्यायिक सदस्य की कीमती साड़ियां खोलेंगी राज

घूसकांड में पकड़े गए आरोपियों के डिलीट किए मोबाइल चैट्स को CBI ने रिकवर करवाया है, जिसमें कई अहम सबूत हाथ लगे हैं. 2 दिसम्बर तक रिमांड पर आमने-सामने बैठाकर आरोपियों से दोबारा पूछताछ होगी.

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जयपुर ITAT रिश्वतकांड में CBI के हाथ लगे अहम सुराग

Rajasthan News: जयपुर के आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) में घूसकांड से जुड़े मामले में सीबीआई को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं. सीबीआई की छापेमारी में ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस सीतालक्ष्मी की तलाशी में कीमती साड़ियां न गहने मिले हैं, जिसे कैश देकर किसी दूसरे लोगों ने खरीदा था. इनकम टैक्स में अपीलीय न्यायधिकरण की ज्यूडिशियल मेंबर की ऐश आराम से जुड़ी चीजों की खरीब भी दूसरे व्यक्ति ने की. इसके अलावा गिरफ्तार किए एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया के सर्च में एक डायरी मिली है.

डायरी में मिला पुराना हिसाब-किताब

वकील राजेंद्र सिसोदिया के यहां पर मिली डायरी में ITAT अफसरों से किए लेन-देन का पुराना हिसाब मिला है. घूसकांड में पकड़े गए आरोपियों के डिलीट किए मोबाइल चैट्स को CBI ने रिकवर करवाया है, जिसमें कई अहम सबूत हाथ लगे हैं. CBI की लिस्ट में शामिल लोगों को पकड़ जल्द ही पूरे मामले का क्रॉस वेरिफिकेशन करवाया जाएगा. 2 दिसम्बर तक रिमांड पर आमने-सामने बैठाकर आरोपियों से दोबारा पूछताछ होगी.

5.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुआ था वकील

सीबीआई ने सबसे पहले 25 नवंबर 2025 को 5.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए एक एडवोकेट राजेंद्र सिसोदिया को गिरफ्तार किया था. इसके बाद 26 नवंबर को CBI ने ITAT जयपुर की ज्यूडिशियल मेंबर डॉ. एस. सीथालक्ष्मी को गिरफ्तार किया. उनकी सरकारी गाड़ी से 30 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. इसके अलावा ITAT जयपुर में हुए घोटाले में गिरफ्तार तीसरा शख्स मुज्जम्मिल है. मुज्जम्मिल अपीलकर्ता है और उसी ने रिश्वत की पूरी डील सेट की थी. ये वही शख्स है जिसका केस चल रहा था और जिसने पैसे का इंतजाम किया.

ज्यूडिशियल मेंबर कमलेश राठौड़ गिरफ्तार

सीता लक्ष्मी की गिरफ्तारी के बाद दूसरे ज्यूडिशियल मेंबर कमलेश राठौड़ को सीबीआई ने गिरफ्तार किया. सीबीआई द्वारा जब्त किए गए ITAT के रिकॉर्ड से चौकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. कमीशनखोरी व रिश्वत के लिए वकीलों, CA व प्राइवेट व्यक्तियों का बड़ा गिरोह इसमें शामिल है. सीबीआई छापे की कार्रवाई की भनक लगते ही गैंगेस्टर CA फरार हो गया. जानकारी के मुताबिक, तीन साल में 99 फीसदी केसों में आयकर विभाग को हरवाया गया. चंद करोड़ रुपए की रिश्वत और कमीशन से हजारों करोड़ों का नुकसान किया गया. 

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