कानूनी लड़ाई में उलझा राजस्थान क्रिकेट का भविष्य! हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची RCA की लड़ाई

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की जा चुकी है. दूसरी ओर, हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनावी प्रक्रिया पर फैसला हो सकता है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव को लेकर जारी कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. राजस्थान हाईकोर्ट की डबल बेंच के आरसीए की एडहॉक व्यवस्था को निलंबित कर प्रशासक नियुक्त करने के आदेश के खिलाफ स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की गई है. वहीं, मेघा गौड़ ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है. RCA की याचिका पर कोई भी आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष सुना जाएगा. इस घटनाक्रम ने राजस्थान क्रिकेट में लंबे समय से चल रहे चुनावी विवाद को नया मोड़ दे दिया है. चुनाव विवाद के साथ-साथ जयपुर जिला क्रिकेट संघ (JDCA) की स्थिति भी सवालों के घेरे में है. जेडीसीए पिछले करीब 6 वर्षों से निर्वाचित कार्यकारिणी के बजाय एडहॉक कमेटी के जरिए संचालित हो रहा है.

29 जुलाई तक रजिस्ट्रार को देना है जवाब 

दरअसल, 1 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एडहॉक कमेटी को निलंबित करते हुए पूर्व चुनाव आयुक्त भास्कर ए. सावंत को प्रशासक नियुक्त किया था. अदालत ने उन्हें चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी. साथ ही रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों को 29 जुलाई तक जवाब देना है कि आखिर 2 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद चुनाव क्यों नहीं कराए गए. कोर्ट ने यह भी पूछा कि इस मामले में रजिस्ट्रार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

Advertisement

आरसीए ने किया सुप्रीम कोर्ट का रूख

हाईकोर्ट के आदेश के बाद आरसीए ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. एसएलपी में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने RCA का पक्ष सुने बिना एडहॉक कमेटी को निलंबित कर दिया. याचिका में बीसीसीआई, राज्य सरकार, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां और राजीव प्रताप सिंह राठौड़ को पक्षकार बनाया गया है. दूसरी ओर, मेघा गौड़ की ओर से दायर कैविएट के बाद चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगना भी आसान नहीं होगा.

वहीं, जयपुर जिला क्रिकेट संघ (JDCA) का 6 साल पुराना मामला भी फिर सुर्खियों में है. साल 2018 में जेडीसीए के चुनाव हुए थे, लेकिन उसके बाद वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे. 30 जनवरी 2020 को रजिस्ट्रार सहकारी समितियों ने जांच के आदेश दिए और तीन महीने में चुनाव कराने को कहा. इसी दौरान मतदाता सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया. 

कानूनी अड़चन और कोरोना महामारी से भी चुनाव प्रक्रिया प्रभावित

फिर कोरोना महामारी और कानूनी अड़चनों के चलते 22 मार्च 2020 को प्रस्तावित चुनाव नहीं हो सके. तब से जयपुर संघ में निर्वाचित कार्यकारिणी नहीं बन सकी और एडहॉक कमेटी ही कामकाज संभाल रही है. हाल ही में जिला क्रिकेट संघ की एडहॉक कमेटी ने 75 क्रिकेट क्लबों की सदस्यता समाप्त कर दी. इस फैसले का कई क्लबों ने विरोध किया है. उनका कहना है कि एडहॉक कमेटी के पास इतनी बड़ी कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है. क्लबों का आरोप है कि उन्हें सुनवाई का पूरा अवसर दिए बिना सदस्यता खत्म कर दी गई.

क्लब के खिलाफ कार्रवाई पर भी सियासत गरमाई

जबकि एडहॉक कमेटी के सदस्य आनंद सिंह का कहना है कि जिन क्लब के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई वे सब कागजों में चल रहे थे.उनका कहना है, "जयपुर क्रिकेट में सुधार तभी संभव है, जब नियमित चुनाव कराए जाएं. एक व्यक्ति-एक पद का सिद्धांत लागू हो और परिवारवाद समाप्त किया जाए. कुछ लोगों का वर्षों से क्रिकेट प्रशासन पर प्रभाव बना हुआ है और क्लबों के जरिए वोट बैंक की राजनीति की जाती रही है."

Advertisement

अब राजस्थान क्रिकेट की नजर दो मोर्चों पर टिकी है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट आरसीए की एसएलपी पर सुनवाई करेगा. दूसरी ओर, हाईकोर्ट के आदेश के तहत प्रशासक को चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ानी है. अदालतों के अगले फैसले यह तय करेंगे कि राजस्थान क्रिकेट में लंबे समय से रुकी चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी या कानूनी लड़ाई के कारण इसमें और देरी होगी. साथ ही जयपुर की छह साल पुरानी एडहॉक व्यवस्था और 75 क्लबों की सदस्यता समाप्त करने के फैसले की वैधता पर भी आगे स्थिति साफ हो सकती है.

यह भी पढ़ेंः खराब मौसम के चलते 11 उड़ानें जयपुर डायवर्ट, दिल्ली में नहीं हो पाई लैंडिंग