राजस्थान में साइबर सुरक्षा को बड़ी मजबूती, जल्द बनेगा R4C सेंटर; 1930 हेल्पलाइन ऑपरेटरों को मिलेगी ट्रेनिंग

राजस्थान साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1930 हेल्पलाइन ऑपरेटरों के लिए दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित हुई. इसमें राज्य के अपने साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर R4C की घोषणा की गई. 

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राजस्थान बनेगा ऑर्डिनेशन सेंटर R4C

Rajasthan News: राजस्थान अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छूने को तैयार है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सोच के मुताबिक राज्य को साइबर और महिला सुरक्षा का आदर्श बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया. पुलिस मुख्यालय में राजस्थान पुलिस और साइबरपीस संगठन ने मिलकर 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन के ऑपरेटरों के लिए दो दिनों की विशेष वर्कशॉप आयोजित की. इस कार्यक्रम का समापन उत्साह से भरा रहा जहां सभी ने मजबूत इरादे जताए.

केंद्र की राह पर राजस्थान

वर्कशॉप के आखिरी दिन डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणा बताई. उन्होंने कहा कि केंद्रीय भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C की तरह अब राजस्थान में अपना साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (R4C) बनेगा.

यह केंद्र साइबर अपराधों से लड़ने में उत्कृष्टता का प्रतीक होगा. यहां से पूरे राज्य के जिलों में जानकारी बांटी जाएगी और जांच के लिए मजबूत सिस्टम तैयार होगा. इससे साइबर ठगों पर तेजी से शिकंजा कसा जा सकेगा.

संवेदना और स्पीड का कमाल

डीजीपी राजीव शर्मा ने ऑपरेटरों को हौसला बढ़ाते हुए कहा कि साइबर शिकायतों का जवाब देना अब एक कला है. उनकी जिम्मेदारी है कि पीड़ितों के साथ संवेदना रखें और तेजी से काम करें. इससे पीड़ितों का खोया पैसा जल्दी वापस मिल सकता है.

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उन्होंने समय के महत्व पर जोर दिया और बताया कि फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका कितनी अहम है. ऐसे प्रशिक्षणों से ऑपरेटरों के कौशल बढ़ेंगे और साइबर अपराध रुकेंगे. उन्होंने सलाह दी कि तकनीक से अपडेट रहें और पीड़ितों की मदद में कोई कसर न छोड़ें.

सम्मान और विशेष पल, उत्कृष्टता को सलाम

समारोह में डीजीपी राजीव शर्मा और एडीजी साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने शानदार काम करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और यादगार चीजें देकर सम्मानित किया.

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साइबरपीस के संस्थापक मेजर विनीत कुमार ने बताया कि ऐसे तकनीकी प्रशिक्षण पुलिस को नई चुनौतियों से लड़ने के लिए सशक्त बनाते हैं.

दक्षता और इंसानियत का मेल

यह दो दिनों की वर्कशॉप मुख्य रूप से 1930 हेल्पलाइन ऑपरेटरों की तकनीकी और व्यावहारिक स्किल्स बढ़ाने पर केंद्रित थी. विशेषज्ञों ने गोल्डन ऑवर के बारे में समझाया जहां शुरुआती घंटों में तेज कार्रवाई से पीड़ित की रकम फ्रीज की जा सकती है.

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ऑपरेटरों को नए साइबर धोखों जैसे फिशिंग सोशल इंजीनियरिंग और निवेश घोटालों से निपटने के तरीके सिखाए गए. साथ ही आधुनिक डिजिटल टूल्स और केस हैंडलिंग की बारीकियां बताई गईं.

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