Rajasthan News: राजस्थान में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ी मांग उठी है. गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति (Gurjar Aarakshan Sangharsh Samiti) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राजस्थान के टीएसपी क्षेत्रों में एमबीसी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग को आरक्षण (Reservation) का लाभ तुंरत लागू करने की मांग उठाई है.
वर्तमान आरक्षण नीति के कारण युवा सरकारी नौकरियों से हो रहे है वंचित
समिति अध्यक्ष विजय बैंसला की ओर से लिखे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान आरक्षण नीति के कारण टीएसपी क्षेत्र में रहने वाले इन वर्गों के युवा सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के लाभ से वंचित हैं. पत्र में संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्य किसी भी नागरिक के साथ जन्म स्थान या निवास के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता.
संवैधानिक समानता का दिया हवाला
समिति का कहना है कि मौजूदा टीएसपी आरक्षण नीति के चलते एक ही राज्य के भीतर दो तरह की सामाजिक स्थिति बन गई है.पत्र के अनुसार एक वर्ग को संवैधानिक आरक्षण का पूरा लाभ मिल रहा है जबकि दूसरे वर्ग को केवल निवास क्षेत्र के कारण उससे वंचित रहना पड़ रहा है. गैर-टीएसपी क्षेत्रों में एससी, एसटी, एमबीसी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस को मिलाकर कुल 64% आरक्षण का लाभ मिल रहा है जबकि टीएसपी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत आरक्षण केवल एसटी और एससी वर्ग तक सीमित है और शेष 50 प्रतिशत अनारक्षित है. इससे एमबीसी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के युवाओं को अवसरों में असमानता का सामना करना पड़ रहा है.
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के जरिए लिखा गया पत्र
माननीय मुख्यमंत्री महोदय श्री भजनलाल शर्मा जी, #राजस्थान के #TSP क्षेत्र (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर, राजसमंद आदि) में रहने वाले #MBC, #OBC और #EWS वर्ग के लाखों युवा आज भी सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण से पूरी तरह वंचित हैं।
— विजय बैंसला | Vijay Bainsla (@VijaySBainsla) March 16, 2026
TSP में… pic.twitter.com/Y9k6C5HGt0
क्षेत्रीय असमानता दूर करने की मांग
समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि टीएसपी क्षेत्र की सभी आगामी भर्तियों और शैक्षणिक प्रवेशों में एमबीसी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को गैर-टीएसपी क्षेत्रों की तर्ज पर ही लागू किया जाए. पत्र में उम्मीद जताई गई है कि राज्य सरकार इस लंबे समय से चली आ रही विसंगति को दूर करेगी ताकि किसी भी युवा को केवल उसके निवास स्थान के कारण संवैधानिक लाभों से वंचित न रहना पड़े.पत्र में समिति ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार इस लंबे समय से लंबित असमानता को दूर करते हुए संविधान की समानता की भावना के अनुरूप निर्णय लेगी.
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