Rajasthan Excise Policy: राजस्थान में शराब की दुकानों के समय में बढ़ोतरी का फैसला अब विधानसभा सत्र के बाद ही लिया जाएगा. माना जा रहा है कि दुकानों के बंद होने का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर 9 या 10 बजे तक किया जा सकता है. अंदरखाने इसकी तैयारियां भी चल रही हैं, लेकिन अंतिम निर्णय विधानसभा सत्र की समाप्ति के बाद ही होगा. राजस्थान लिकर वेलफेयर सोसायटी ने नई आबकारी नीति के विरोध में आज जयपुर में शराब की दुकानें बंद रखने का ऐलान किया है. संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है और समय से पहले पुलिस की ओर से शटर बंद की कार्रवाई अनुचित है. सोसायटी ने यह भी मांग की है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर राजस्थान में भी दुकानों के संचालन समय में बढ़ोतरी की जाए. उनका तर्क है कि समय सीमा बढ़ने से न केवल कारोबार स्थिर होगा,. बल्कि अवैध बिक्री पर भी अंकुश लगेगा.
दुकान खोलने के लिए एक घंटे की राहत की मांग
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति में यह अधिकार आबकारी आयुक्त को दे दिया है. ऐसे में समयवृद्धि पर फैसला प्रशासनिक स्तर पर भी संभव है. सूत्रों के अनुसार, सुबह के समय दुकानों को खोलने में भी एक घंटे की राहत दी जा सकती है. राजस्व लक्ष्य को देखते हुए आबकारी विभाग इस दिशा में कदम बढ़ा सकता है. हालांकि विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर फैसला इसलिए नहीं लिया जा रहा है, क्योंकि इससे राजनीतिक विवाद खड़ा होने की आशंका है. कुछ विधायकों ने भी समय बढ़ाने की सिफारिश की है.
गहलोत सरकार के कार्यकाल में घटाया था समय
दरअसल, राजस्थान में शराब की दुकानों को रात 8 बजे बंद करने का निर्णय 24 दिसंबर 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में लिया गया था. इससे पहले दुकानें सुबह 9 बजे से रात 11 बजे तक खुलती थीं. इसके बाद समय बदलकर सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक कर दिया गया. उस समय सरकार ने अपराध नियंत्रण और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने का तर्क दिया था.
पड़ोसी राज्यों में नियम का दिया जा रहा है हवाला
अब तर्क दिया जा रहा है कि पड़ोसी राज्यों में अधिक समय तक दुकान खुली रहती है. मध्यप्रदेश में दुकानें रात साढ़े 11 बजे तक, दिल्ली में 11 बजे तक, चंडीगढ़ और हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में 12 बजे तक तथा उत्तर प्रदेश में 10 बजे तक शराब की दुकानें खुली रहती है. प्रदेश में कुल 7665 शराब की दुकानें हैं, इसमें अकेले 350 दुकानें जयपुर में ही संचालित होती हैं. तर्क दिया जा रहा है कि ऐसे में राजस्थान में समय बढ़ाने पर राजस्व बढ़ोतरी हो सकती है. साथ ही निर्धारित समय के बाद अवैध बिक्री से प्रदेश को राजस्व हानि होती है.
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