किरोड़ी के खुलासे के बाद सालासर बीमा घोटाले में एक्शन, किसानों की जानकारी बिना हो गया इंश्योरेंस

जिन किसानों के नाम पर बीमा दर्शाया गया, उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी और न ही उनसे बीमित भूमि के कोई दस्तावेज लिए गए. पुलिस अब बीमा प्रस्ताव, प्रीमियम वसूली, फसल कटाई प्रयोग रिपोर्ट, क्लेम स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया की कड़ियों की जांच कर रही है. 

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किरोड़ी के खुलासे के बाद सालासर बीमा घोटाले में एक्शन

Rajasthan News: कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के ख़ुलासे के बाद सालासर बीमा मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बैंक मैनेजर और अन्य कर्मचारियों पर आरोप है कि बीमा कंपनियों के अधिकारियों या कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके फर्जी बीमा पॉलिसी जारी कर दी. कृषि विभाग के अधिकारी गोविंद सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया कि 19 जून 2025 से 13 फरवरी 2026 के बीच फसल बीमा योजना से संबंधित प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं. आरोप है कि किसानों से नियमानुसार प्रीमियम राशि वसूली गई, लेकिन बीमा दावे की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई. कुछ मामलों में बिना वास्तविक नुकसान के क्लेम पास करने और कुछ में वास्तविक पात्र किसानों को लाभ से वंचित रखने के आरोप लगाए गए हैं.

71 किसानों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी

गोविंद सिंह राठौड़ ने बताया कि बीमा प्रक्रिया और क्लेम से जुड़े मामलों में गड़बड़ियां सामने आई हैं. एफआईआर के अनुसार, फसल बीमा योजना के संबंधित क्षेत्र के किसानों की भूमि का बीमा कराया गया था. जांच के दौरान सामने आया कि कुल 71 किसानों की कृषि भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ियां पाई गईं. इसमें विभिन्न खसरा नंबरों की जमीन शामिल है. आरोप है कि बीमा कंपनी और उससे जुड़े कार्मिकों ने दस्तावेजों में हेरफेर कर बीमा क्लेम प्रक्रिया को प्रभावित किया. 

करीब 76 लाख 3 हजार 48 रुपए से जुड़े भुगतान और बीमा क्लेम पर सवाल खड़े हुए हैं. मामले में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है. इसके अलावा धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े प्रावधानों को भी जांच के दायरे में रखा गया है. पुलिस अब बीमा प्रस्ताव, प्रीमियम वसूली, फसल कटाई प्रयोग रिपोर्ट, क्लेम स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया की कड़ियों की जांच कर रही है. थाना प्रभारी निरीक्षक सुभाष बिश्नोई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है. पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की तकनीकी जांच, संबंधित अधिकारियों से पूछताछ और बैंक लेनदेन की पड़ताल के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

बीमा कंपनी के कर्मचारियों से मिलीभगत

आरोप है कि चूरू में SBI की सालासर ब्रांच मैनेजर उमेश कुमार सारस्वत, बैंक कर्मचारी भागीरथ नायक (फसल बीमा पॉलिसी जारीकर्ता) और अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों ने Agriculture Insurance Company of India Limited के प्रतिनिधियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी कीं. बज्जू तेजपुरा पटवार मंडल और ग्राम बज्जू खालसा (तहसील गजनेर, जिला बीकानेर) के विभिन्न चकों—चक 11 एनबीएम 7-8 टीपीएम, 1, 2-3 टीपीएसएम, 6, 7, 8, 9 एनबीएम 6-7 एसडब्ल्यूएम, 3, 4, 5, 6 टीपीएम की ऐसी भूमि का बीमा दर्शाया गया, जो राजस्व अभिलेखों में अस्तित्व में ही नहीं पाई गई. 

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बीकानेर में गजनेर तहसीलदार से मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित किसानों के नाम, सर्वे नंबर, मुरब्बा और खसरा नंबरों का मूल राजस्व रिकॉर्ड से मिलान नहीं हुआ. इसके बावजूद सालासर ब्रांच द्वारा 71 कथित किसानों के नाम पर फर्जी कृषि भूमि दर्शाकर लगभग 13 लाख 51 हजार रुपये किसानों के प्रीमियम के रूप में जमा करवाए गए. इसके अलावा राज्य सरकार और भारत सरकार का अंश मिलाकर लगभग 15 लाख 76 हजार 348 रुपये राजकोष से जमा होना बताया गया है. इस प्रकार कुल क्लेम राशि लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. जिन किसानों के नाम पर बीमा दर्शाया गया, उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी और न ही उनसे बीमित भूमि के कोई दस्तावेज लिए गए. 

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