Rajasthan: सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताओं की किडनी फेल, अब बीकानेर में कोटा जैसी घटना

पीबीएम अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूताओं के तबीयत बिगड़ने का मामला जब सुर्खियों में आया तो मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रशासन हरकत में आया. इसके बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल सुरेन्द्र वर्मा और पीबीएम अधीक्षक बीसी घीया ने सीनियर डॉक्टरों के साथ हाईलेवल मीटिंग की.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताओं की किडनी फेल

कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत का मामला अभी तक सुलझा नहीं था. इससे पहले अब बीकानेर के अस्पताल से बड़ी लापरवाही सामने आई है. पीबीएम अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की हालत गंभीर हुई तो जांच में किडनी फेल होने की बात सामने आई है. प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के बाद मंगलवार को चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने स्वास्थ्य भवन में हाईलेवल मीटिंग की. बैठक में कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे. इस दौरान चिकित्सा मंत्री ने बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने से जुड़े मामले की विस्तार से अधिकारियों से जानकारी ली. 

दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं- चिकित्सा मंत्री

बैठक के बाद चिकित्सा मंत्री ने कहा कि बीकानेर प्रकरण को कोटा मामले से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं और उनकी परिस्थितियां भी भिन्न हैं. उन्होंने कहा कि बीकानेर में अलग-अलग समय पर मामले सामने आए हैं और सभी मामले सिजेरियन नहीं बल्कि, सामान्य प्रसव से भी जुड़े हुए हैं.

Advertisement
मंत्री ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली गई है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं. जिसकी रिपोर्ट आज ही सामने आने की संभावना है, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.

चिकित्सा मंत्री ने की हाईलेवल मीटिंग

चिकित्सा मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि राज्य के अस्पतालों में संक्रमण को रोकने और व्यवस्थागत खामियों को लेकर जिस स्तर की प्रक्रिया होनी चाहिए थी. वह पिछले ढाई वर्षों में पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है. उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है और अब थर्ड पार्टी एजेंसी के जरिए अस्पतालों की मॉनिटरिंग कराने पर विचार किया जा रहा है, जिसके तहत तीन से चार कंपनियों को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है जो नियमित रूप से निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर रिपोर्ट देंगी.

2 महिलाओं की हुई सिजेरियन डिलीवरी

बता दें कि संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताएं गंभीर रूप से बीमार हो गईं. जिन महिलाओं की तबीयत बिगड़ी है, उनमें दो की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, जबकि 3 की नॉर्मल डिलीवरी हुई. सभी महिलाओं का ICU में भर्ती कर डायलिसिस पर रखा गया है. वहीं, फलोदी निवासी 20 वर्षीय प्रसूता की हालत गंभीर है, जिसके कारण वेंटिलेटर पर उसका इलाज चल रहा है.

बताया जा रहा है कि डिलीवरी के 10 से 15 दिन बाद प्रसूताओं में गंभीर लक्षण सामने आए थे. जानकारी के अनुसार, डिलीवरी के बाद महिलाओं को यूरिन रुकना, प्लेटलेट्स गिरना, संक्रमण और किडनी फेल होने जैसी समस्याएं हुई. पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर बीसी घीया ने बताया कि प्रेगनेंसी से जुड़ा कॉम्पलिकेशन कई मरीजों को होता है, लेकिन बीते 5-7 दिनों में इससे जुड़े मरीज बढ़े तो हमारे डॉक्टर्स की टीम ने पेशेंट की जांच की और अच्छे तरह से मैनेज कर रहे है.

मरीजों को आईसीयू में भर्ती कर लिया गया है. क्या कारण है, कैसे हुआ है, इसके लिए जांच कमेटी गठित कर दी गई है. जो रिपोर्ट देगी तो सरकार के संज्ञान में लाया जाएगा. अभी 5 मरीज भर्ती हैं. मामला जब सामने आया तो अस्पताल प्रशासन ने जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी बनाई, जो इन्फेक्शन, अत्यधिक ब्लीडिंग और अन्य चिकित्सकीय कारणों की जांच कर रही है. वहीं, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर जानकारी नहीं देने के लगाए आरोप हैं.

Advertisement

यह भी पढे़ं- कोटा के अस्पताल में महिलाओं की मौत पर बड़ा अपडेट, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल जांच में फेल