Rajasthan News: राजस्थान की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में डीएनए जांच किट की खरीद को लेकर बड़ा वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम को हिला दिया है. आरोप है कि जिन किट्स का इस्तेमाल रेप और मर्डर जैसे संवेदनशील मामलों की जांच में किया जाता है उन्हें बाजार से कई गुना महंगे दामों पर खरीदा गया जिससे करोड़ों रुपए की गड़बड़ी का शक जताया जा रहा है. इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन डायरेक्टर डॉ अजय शर्मा समेत चार अधिकारियों को पद से हटा दिया है और जांच शुरू कर दी गई है.
कीमतों में चौंकाने वाला अंतर
सूत्रों के मुताबिक एक ही कंपनी और एक ही प्रोडक्ट की कीमतों में भारी अंतर सामने आया है जिसने सबसे ज्यादा हैरान किया है. कुछ मामलों में दूसरे राज्यों के मुकाबले कीमतें 11 गुना तक ज्यादा पाई गई हैं जिससे खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
लाखों रुपए का सीधा अंतर
अगर कीमतों पर नजर डालें तो ऑटोसोमल एसटीआर डीएनए किट राजस्थान में करीब 4 लाख रुपए से ज्यादा में खरीदी गई जबकि हरियाणा में यही किट करीब 83 हजार रुपए में उपलब्ध रही जिससे प्रति यूनिट करीब 3.20 लाख रुपए का अंतर सामने आया है.
इसी तरह वाई क्रोमोसोमल एसटीआर किट राजस्थान में 4.74 लाख रुपए में खरीदी गई जबकि हरियाणा में इसकी कीमत करीब 1.25 लाख रुपए बताई जा रही है. वहीं एसटीआर एम्प्लीफिकेशन किट राजस्थान में करीब 4.30 लाख रुपए में खरीदी गई जबकि हरियाणा में यह केवल 37 हजार 700 रुपए में उपलब्ध रही जिससे लगभग 3.92 लाख रुपए का अंतर सामने आया है.
शिकायत के बाद भी नहीं रुकी खरीद
बताया जा रहा है कि 22 मई 2024 को स्टोर प्रभारी डॉ रमेश चौधरी ने ई फाइल के जरिए इस पूरे मामले की जानकारी सरकार को दी थी. जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023-24 के दौरान लगातार महंगी दरों पर किट्स खरीदी जाती रहीं और शिकायत किए जाने के बावजूद 25 जून 2024 को भी खरीद को मंजूरी दे दी गई जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है.
सरकार का एक्शन और जांच शुरू
मामला सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तत्कालीन डायरेक्टर डॉ अजय शर्मा सहित चार अधिकारियों को एपीओ कर दिया है. इसके साथ ही नए डायरेक्टर आरके मिश्रा को जिम्मेदारी दी गई है जिन्होंने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है.
क्या बोले नए डायरेक्टर
नए डायरेक्टर आरके मिश्रा का कहना है कि उन्हें हाल ही में जिम्मेदारी मिली है और सभी आरोपों की बारीकी से जांच की जा रही है. उन्होंने साफ कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
क्यों गंभीर है पूरा मामला
यह मामला इसलिए बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि फॉरेंसिक जांच को न्याय व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. ऐसे में अगर इसी प्रणाली में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं तो इसका असर केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं रहता बल्कि रेप और मर्डर जैसे संवेदनशील मामलों की जांच पर भी सीधा असर पड़ सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आखिर क्या सच्चाई सामने आती है.
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