Rajasthan: गूगल ने मिलाया बिछड़ा रिश्ता, 30 साल बाद फ्रांसीसी दंपति पहुंचे राजस्थान के इस गांव

गिरार्ड कहते हैं कि भारत उनके दिल में बसता है और यहां की संस्कृति में सच्चा अपनापन झलकता है. गांव का शांत वातावरण उन्हें मानसिक शांति देता है और वे चाहते हैं कि जीवन की शेष सांसें भी भारत में ही लें.

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Pali News: भारतीय संस्कृति और परम्परा का आकर्षण केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी भी इसकी गहराई से प्रभावित होते हैं. भारतीय जीवनशैली, रीति-रिवाज और लोगों की अपनायत कई बार उन्हें इतना बाँध लेती है कि वे इसे अपने जीवन में भी उतारने की कोशिश करते हैं. ऐसा ही एक भावुक नजारा राजस्थान के पाली जिले के सोड़ावास गांव में देखने को मिला, जब 30 साल बाद एक फ्रांसीसी दंपति अपनी पुरानी यादों के सहारे फिर उसी गांव लौट आया.

साल 1995 में फ्रांस निवासी गिरार्ड और उनकी पत्नी शोलेज, जिनकी वर्तमान आयु क्रमशः 85 और 73 वर्ष है, अपने तीन बच्चों के साथ भारत भ्रमण पर आए थे. उन्होंने एक रिक्शा खरीदा और उसे अपने परिवार व सामान के अनुसार तैयार किया. रणकपुर दर्शन के बाद पाली लौटते समय उनका सफर सोड़ावास गांव से होकर गुजरा, जहाँ भोपाल सिंह नामक ग्रामीण ने उन्हें देखकर बातचीत की और चाय के लिए अपने घर आमंत्रित किया.

अपना रिक्शा भी गांव में ही छोड़ दिया था 

भोपाल सिंह और उनकी मां के स्नेहपूर्ण आग्रह को दंपति टाल नहीं पाए और गांव पहुंचे. ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत और प्रेम से वे इतने प्रभावित हुए कि पूरा परिवार एक महीने तक सोड़ावास में ही ठहर गया. इस दौरान उन्होंने गांव की संस्कृति, परम्पराएं, खान-पान और जीवनशैली को बहुत करीब से देखा. जाते समय उन्होंने अपना रिक्शा भी गांव में ही छोड़ दिया, जो उनके लगाव का प्रतीक बन गया.

तीस साल बाद बदल गई गांव की तस्वीर 

तीस साल बाद जब दंपति दोबारा सोड़ावास पहुंचे तो गांव की बदली हुई तस्वीर देखकर वे चकित रह गए. कभी कच्चे मकान, टूटी सड़कों और गलियों में खेलते बच्चों वाला गांव अब पक्की इमारतों और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हो चुका था. हालांकि समय के साथ विकास हुआ था, लेकिन गांव की संस्कृति और लोगों का अपनापन आज भी वैसा ही था जैसा 30 साल पहले, जिसने दंपति को भावुक कर दिया.

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बेटी ने ढूंढ निकाला गाँव 

गिरार्ड के मन में सोड़ावास की यादें हमेशा जीवित रहीं, लेकिन गांव का नाम और लोकेशन उन्हें याद नहीं आ रही थी. आखिरकार उनकी बेटी ने गूगल की मदद से गांव को ढूंढ निकाला. 4700 किलोमीटर दूर बसे इस गांव की यादें उन्हें फिर खींच लाई. बेटी पहले 2025 में अपने पति के साथ सोड़ावास आई और फिर 15 जनवरी को अपने माता-पिता को यहां भेजा, ताकि वे अपने पुराने पलों को फिर से जी सकें.

भारत उनके दिल में बसता है

गिरार्ड कहते हैं कि भारत उनके दिल में बसता है और यहां की संस्कृति में सच्चा अपनापन झलकता है. गांव का शांत वातावरण उन्हें मानसिक शांति देता है और वे चाहते हैं कि जीवन की शेष सांसें भी भारत में ही लें. सोड़ावास के मंदिर और लोगों की धार्मिक आस्था से प्रेरित होकर उन्होंने फ्रांस में भी एक मंदिर बनवाया है, जहाँ वे प्रतिदिन पूजा करते हैं. पेशे से आर्टिस्ट गिरार्ड भारत सहित विभिन्न संस्कृतियों को अपनी कला में उकेरते रहते हैं.

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