राजस्थान में फ्लोराइड बना 'साइलेंट किलर', 17 जिलों में बढ़ा 4 गुना खतरा, बाड़मेर में शिशु दर प्रभावित

राजस्थान में 4.6 करोड़ से अधिक की आबादी गंभीर भू-जल संकट और फ्लोराइड प्रदूषण की चपेट में है. विजय सिंह बैंसला की 'भेद्यता विश्लेषण रिपोर्ट' के अनुसार, राज्य के 17 जिलों में फ्लोराइड तय सीमा से 4 गुना अधिक है, जिससे नागौर-बाड़मेर में फ्लोरोसिस और शिशु मृत्यु दर बढ़ रही है.

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Rajasthan Ground Water Crisis
Meta (AI)

Rajasthan Ground Water Crisis 2026: राजस्थान इस समय एक बेहद गंभीर भू-जल तथा जन स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा है. राज्य के एक बड़े हिस्से में फ्लोराइड प्रदूषण, तेजी से गिरते जलस्तर और उससे पैदा होने वाली जानलेवा बीमारियों ने कोहराम मचा रखा है. यह चौंकाने वाला खुलासा भाजपा नेता विजय सिंह बैंसला के जरिए तैयार की गई एक 'भेद्यता विश्लेषण रिपोर्ट' (Vulnerability Analysis Report) में सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान का जल संकट अब महज एक चक्रात्मक (Cyclical) समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह संरचनात्मक (Structural) रूप ले चुका है, क्योंकि हर साल पानी की निकासी प्राकृतिक पुनर्भरण (Natural Recharge) से कहीं ज्यादा हो रही है.

 1 लीटर पानी रीचार्ज हो रहा, तो निकाला जा रहा 1.51 लीटर

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2022 में भू-जल निकालने के कारण यह 1.51 प्रतिशत तक पहुंच गया था. क्योंकि प्रकृति जितना पानी जमीन के नीचे भेज रही है, इंसान उसके मुकाबले डेढ़ गुना से भी अधिक (1.51 लीटर) पानी बाहर खींच रहा है. उस अकेले वर्ष में ही राज्य का भू-जल अधिविकर्ष (Overdraft) 4.43 अरब घन मीटर तक पहुंच गया था.

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इस कारण राज्य में भू-जल ब्लॉकों की संख्या 2015 के 198 से बढ़कर 2022 में 219 हो गई है, जबकि पूरी तरह सुरक्षित श्रेणी वाले ब्लॉक 52 से घटकर महज 38 रह गए हैं. मानसून से ठीक पहले की भू-जल गहराई भी साल 2015 में 24.5 मीटर दर्ज थी, जो साल 2024 तक बढ़कर 28.8 मीटर तक नीचे जा चुकी है. वर्तमान में स्थिति यह है कि राज्य के हर पांच में से चार भू-जल ब्लॉक ‘गंभीर' या ‘अत्यधिक दोहन' की श्रेणी में है.

 नागौर में तय सीमा से 4 गुना अधिक जहर

इस विश्लेषण रिपोर्ट में पानी की खराब गुणवत्ता के असर को भी रेखांकित किया गया है. पश्चिमी राजस्थान का फ्लोराइड बेल्ट जिसमें नागौर, बाड़मेर, जालोर, जोधपुर, सीकर और झुंझुनूं शामिल हैं, इससे सबसे ज्यादा ग्रस्त हैं.

राज्य के 17 जिलों में फ्लोराइड का स्तर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तय की गई सुरक्षित सीमा (1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर) से कहीं ज्यादा मिला है. इसमें भी नागौर जिले ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जहां फ्लोराइड का स्तर 5.8 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जो सुरक्षित सीमा से लगभग चार गुना अधिक है.

हड्डियां और दांत गल रहे

आईसीएमआर (ICMR) से जुड़ी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के विश्लेषण में बताया गया है कि नागौर की 68 प्रतिशत आबादी 'डेंटल फ्लोरोसिस' (दांतों का खराब होना) और 24 प्रतिशत आबादी 'स्केलेटल फ्लोरोसिस' (हड्डियों और जोड़ों की विकृति) की गंभीर शिकार हो चुकी है. चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण मंगलूनिया के अनुसार, लंबे समय तक ऐसा दूषित पानी पीने से जोड़ों में परमानेंट दर्द, हाथ-पांव का मुड़ जाना, अस्थि क्षति, गुर्दे की गंभीर बीमारियां और हृदय संबंधी तनाव पैदा हो जाता है.

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बढ़ रही है शिशु मृत्यु दर

आईसीएमआर से जुड़ी सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, नागौर में 68 प्रतिशत लोग डेंटल फ्लोरोसिस और 24 प्रतिशत लोग स्केलेटल फ्लोरोसिस से प्रभावित हैं. लंबे समय तक फ्लोराइड युक्त पानी पीने से अस्थि क्षति, गुर्दे की बीमारियां और हृदय संबंधी तनाव हो सकता है.इतना ही नहीं,  फ्लोराइड प्रभावित जिलों में शिशु मृत्यु दर भी अधिक पाई गई. इन जिलों में औसतन 45.9 प्रति 1000 जीवित जन्म रही, जबकि अपेक्षाकृत साफ पानी वाले जिलों में यह दर 37.5 रही. बाड़मेर में राज्य की सबसे अधिक शिशु मृत्यु दर 56 प्रति 1000 जीवित जन्म दर्ज हुई. वर्तमान में नागौर, बाड़मेर, जालौर और जैसलमेर को 'अत्यधिक संवेदनशील' श्रेणी में रखा गया है, जहां की लगभग 4.6 करोड़ से अधिक आबादी इस खतरे के बीच जीने को मजबूर है. हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि दक्षिणी आदिवासी जिलों (बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़) में पानी की गुणवत्ता अपेक्षाकृत साफ है, पर वहां गरीबी, स्कूल छोड़ने और बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्याएं अब भी हावी हैं.

जल संरक्षण के हो पुख्ता इंतजाम

दूसरी ओर, भू-विज्ञानी प्रो. एम.के. पंडित और जल संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. एस.के. जैन ने चेतावनी दी है कि शहरों में बन रही बड़ी इमारतों में जल संरक्षण  के पुख्ता इंतजाम न होना इसे बढ़ा रहा है. उन्होंने सुझाव दिया है कि मानसून के पानी को सहेजने के लिए राज्य के पारंपरिक जल निकायों जैसे तालाब, झील, नदियां और डैम को सही किया जाए.

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