Neerja Modi School: जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल को राजस्थान हाईकोर्ट से एक महीने की राहत मिल गई है. जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकलपीठ ने स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा छात्रों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया पर एक माह तक रोक लगा दी. हालांकि, अदालत ने इस चरण पर CBSE के मान्यता (संबद्धता) रद्द करने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने निर्देश दिए कि स्कूल एक सप्ताह में CBSE के समक्ष अपना पक्ष रखे, जबकि CBSE को स्कूल के प्रतिनिधित्व पर तीन सप्ताह में फैसला लेना होगा. तब तक कक्षा 9 और 11 के छात्रों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी.
CBSE की ओर से पेश वकील एमएस राघव ने बहस में कहा कि स्कूल की याचिका 'मेंटेनेबल' (चलने योग्य) नहीं है. बोर्ड के नियमों के अनुसार स्कूल के पास पहले प्रतिनिधित्व का विकल्प उपलब्ध था, लेकिन स्कूल ने वैकल्पिक कानूनी उपायों को नजरअंदाज कर सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इसलिए याचिका खारिज होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल में छात्र सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन हुआ है. ऐसे असुरक्षित वातावरण में बच्चों को पढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
CBSE को तीन सप्ताह में स्कूल के पक्ष पर फैसला लेने का आदेश दिया
स्कूल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार शर्मा और अधिवक्ता रचित शर्मा ने दलील दी कि CBSE ने उनका जवाब सुना ही नहीं. उन्होंने बताया कि प्रतिक्रिया में कई दस्तावेजी साक्ष्य दिए गए थे, लेकिन उन्हें अनदेखा कर दिया गया. अब प्रतिनिधित्व पर भी CBSE को ही फैसला करना है, जहां से न्याय की उम्मीद नहीं. साथ ही, कोई समयसीमा भी निर्धारित नहीं है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने CBSE को तीन सप्ताह में स्कूल के पक्ष पर फैसला लेने का आदेश दिया.
अमायरा के परिजनों के वकील ने क्या कहा ?
वहीं, अमायरा के परिजनों की ओर से वकील अमूल्य जेमिनी ने कहा कि स्कूल के पास सीबीएसई उपनियमों के खंड 10,13 के अनुसार वैकल्पिक उपचार उपलब्ध है. यह रिट याचिका उन विकल्पों को प्रयोग किए बिना लगाई गई है. स्कूल को सबसे पहले सीबीएसई अध्यक्ष के समक्ष प्रतिनिधित्व करना चाहिए था, उसके बाद ही रिट लगानी चाहिए थी.
इस पर कोर्ट ने कहा कि स्कूल को पहले एक सप्ताह के अंदर सीबीएसई के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए. वहीं, सीबीएसई को स्कूल के जवाब पर तीन सप्ताह के अंदर विचार करना चाहिए. इस बीच यदि छात्रों को शिफ्ट करने की कोई प्रक्रिया चल रही है, तो उसे जारी नहीं रखना चाहिए. हालांकि स्कूल का डी-एफिलिएशन अभी भी पूर्ण रूप से लागू है. केवल छात्रों को जल्दबाजी में शिफ्ट न किया जाए. इस पर विचार किया गया है.
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, नीरजा मोदी स्कूल की कक्षा-4 की 9 वर्षीय छात्रा अमायरा ने 1 नवंबर 2025 को स्कूल के चौथे माले से कूदकर आत्महत्या कर ली थी. घटना के बाद CBSE द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि स्कूल में एंटी-बुलिंग और POCSO समितियां केवल कागजों पर मौजूद थीं.
जमीनी स्तर पर ये समितियां सक्रिय नहीं थीं, जिसके कारण बच्ची डेढ़ साल से बुलिंग का शिकार हो रही थी. अभिभावकों ने चार बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. समिति ने अकादमिक और सुरक्षा संबंधी कई कमियां भी उजागर कीं. इसके आधार पर CBSE ने 30 दिसंबर 2025 को स्कूल की मान्यता रद्द कर दी.