राजस्थान हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के कारण प्रेग्नेंट हुई एक नाबालिग लड़की को 25 हफ्ते का गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी है. जस्टिस बिपिन गुप्ता ने पीड़िता की मां द्वारा दायर याचिका पर सुनाई करते हुए यह फैसला दिया है. कोर्ट ने संबंधित जिले के मेडिकल बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के साथ सुरक्षित रूप से गर्भपात कराया जाए. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि यदि प्रक्रिया के दौरान शिशु का जन्म होता है, तो उसकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.
रेप से हुई थी गर्भवती
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता सोनल सिंह ने पैरवी की. उन्होंने अदालत को बताया कि नाबालिग दुष्कर्म के कारण गर्भवती हुई है, और वह इस अवांछित गर्भ को जारी नहीं रखना चाहती. पीड़िता की मां ने कहा कि उनकी बेटी अभी तक इस घटना के सदमे से उबर नहीं पाई है, और यदि गर्भ जारी रहा तो उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है.
गर्भ रखने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि नाबालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ अवांछित गर्भावस्था को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. चूंकि, गर्भावस्था दुष्कर्म का परिणाम है और पीड़िता ने गर्भ जारी रखने से इनकार किया है, ऐसे में उसे प्रसव के लिए मजबूर करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा.
सुनवाई के दौरान मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि गर्भावस्था जारी रखना पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, हालांकि गर्भ समापन की प्रक्रिया जोखिमपूर्ण होगी.
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