राजस्थान में खनन पट्टा जारी करने के मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 93 लीजों को खत्म करने का आदेश

हाई कोर्ट ने प्रकरण से जुड़ी 93 लीजों को समाप्त करने के आदेश दिए हैं. हाई कोर्ट की ओर से कहा  गया है कि खनन पट्टों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशों की पालना होनी चाहिए.

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राजस्थान हाई कोर्ट

Rajasthan High Court: राजस्थान में खनन को लेकर पूरे प्रदेश में गहमा-गहमी मची हुई है. इस बीच राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश में खनन पट्टे जारी करने से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है. कोर्ट ने प्रकरण से जुड़ी 93 लीजों को समाप्त करने के आदेश दिए हैं. हाई कोर्ट की ओर से कहा  गया है कि खनन पट्टों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशों की पालना होनी चाहिए. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सभी लीज धारियों को उनकी अमानत राशि लौटाए जाएं. 

चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बीएस संधू की खंडपीठ ने डॉ.बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं. कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनकर 31 अक्टूबर 2025 को फैसला सुरक्षित रखा था. याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अनिकेत व्यास, हिमांशु मीणा ने पैरवी की.

निरस्त 93 लीज चार जिलों से

एडवोकेट हिमांशु मीणा ने बताया कि निरस्त की गई 93 बजरी लीज में भीलवाड़ा की 48, टोंक की 34, अजमेर की 9 और सवाई माधोपुर की 2 लीज शामिल है. हालांकि फिलहाल इन 93 लीज में से 16 में ही बजरी खनन का काम चल रहा है. 

खानों की नीलामी को चुनौती

याचिकाकर्ता की ओर से 6 मार्च 2025 को खानों की नीलामी को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी. क्योंकि नीलामी में शामिल सभी पट्टे उन क्षेत्रों पर चिह्नित किए गए थे जिन पर पिछले पांच वर्षों में पहले ही खनन कर चुके थे. यह उस सरकारी हलफनामे के विपरीत था, जो सुप्रीम कोर्ट में नीलामी की अनुमति लेते समय दायर किया गया था. साथ ही, CEC की सिफारिशों को भी सरकार ने नीलामी के दौरान स्थगित रखा था.

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उन्होंने बताया कोर्ट ने इस मामले में सरकार से जवाब मांगा था. इसके बाद कोर्ट ने पाया कि नीलामी के दौरान CEC की सिफारिशों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना नहीं हुई.

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