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This Article is From Jan 07, 2026

टीचर ट्रांसफर पॉलिसी पर सवाल करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक है

राज्यों में न तो कोई प्रभावी ट्रांसफर पॉलिसी है, और न ही शिक्षकों व कर्मचारियों के तबादलों को नियंत्रित करने के स्पष्ट नियम मौजूद हैं. अदालत ने यह भी कहा कि शैक्षणिक सत्र के बीच सामूहिक तबादले करना अनुचित और शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक है.

टीचर ट्रांसफर पॉलिसी पर सवाल करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक है
प्रतीकात्मक फोटो AI

Rajasthan Teacher Transfer Policy: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में शिक्षकों के तबादलों से जुड़ी सरकारी कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकांश राज्यों में न तो कोई प्रभावी ट्रांसफर पॉलिसी है, और न ही शिक्षकों व कर्मचारियों के तबादलों को नियंत्रित करने के स्पष्ट नियम मौजूद हैं. अदालत ने यह भी कहा कि शैक्षणिक सत्र के बीच सामूहिक तबादले करना अनुचित और शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक है.

बड़े पैमाने पर प्रिसिपलों का ट्रांसफर प्रशासनिक मनमानी

राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस अशोक जैन की एकलपीठ ने यह अवलोकन तब किया जब प्रिंसिपल हरगोविंद मीणा के तबादला आदेश पर सुनवाई करते हुए उस पर अंतरिम रोक लगाई गई. अदालत ने कहा कि सरकार को शिक्षा कैलेंडर की जानकारी होते हुए भी सितंबर में बड़े पैमाने पर प्रिंसिपलों के तबादले कर देना यह दर्शाता है कि शिक्षा व्यवस्था छात्रों की आवश्यकता के बजाय प्रशासनिक मनमानी से चल रही है.

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4,527 प्रिंसिपलों के सामूहिक तबादला

अदालत ने कहा कि 22 सितंबर 2025 को शैक्षणिक सत्र के बीच किए गए 4,527 प्रिंसिपलों के सामूहिक तबादले से न केवल शिक्षक बल्कि उतने ही स्कूल और छात्र भी प्रभावित हुए. कोर्ट ने ऐसी परंपराओं को निंदनीय बताते हुए कहा कि सरकार को शिक्षकों के तबादले शैक्षणिक सत्र के मध्य नहीं, बल्कि गर्मी की छुट्टियों (डेढ़ माह की समर वैकेशन) के दौरान करने चाहिए.

पांच माह के भीतर दूसरी बार तबादला

अदालत ने इस मामले में राजस्थान सिविल सर्विस अपीलेट ट्रिब्यूनल (रेट) की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए. न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता का पांच माह के भीतर दूसरी बार तबादला किया गया, लेकिन रेट ने मेरिट पर विचार किए बिना अनुचित और पूर्वाग्रही दृष्टिकोण अपनाया. जबकि इसी तरह के कई मामलों में रेट ने तबादला आदेशों पर रोक लगाई थी.

अदालत ने कहा कि रेट के चेयरमैन और सदस्यों से निष्पक्षता और निर्लिप्तता की अपेक्षा की जाती है. जब रेट सरकारी कर्मचारियों की शिकायतों के निवारण का प्राथमिक मंच है, तो अदालत आंखें बंद नहीं रख सकती.

न्यायालय ने कार्मिक विभाग को निर्देश दिया कि रेट के चेयरमैन और सदस्यों को उचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थितियों से बचा जा सके.

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