थानों में लावारिस पड़े वाहनों का मामला, राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से तलब की रिपोर्ट 

याचिकाकर्ता के वकील सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि प्रदेश के थानों में अरबों रुपये के वाहन वर्षों से जब्त पड़े हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो

Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के विभिन्न थानों में लावारिस पड़े वाहनों के निस्तारण से जुड़े मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है. अदालत ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इन वाहनों के निपटारे के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.यह आदेश जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता महेश झालानी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया.

प्रदेश के थानों में अरबों रुपये के वाहन वर्षों से जब्त पड़े

याचिकाकर्ता के वकील सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि प्रदेश के थानों में अरबों रुपये के वाहन वर्षों से जब्त पड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को इनका तय समयसीमा में निस्तारण करने का आदेश दिया है और पालन न करने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की है.याचिका में कहा गया कि थानों में खुले में पड़े ये वाहन वर्षों तक लावारिस रहने से कबाड़ बन चुके हैं.

समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने की मांग

बाद में इन्हें सड़क पर चलाने से न केवल वे असुरक्षित हो जाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में इनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने की मांग की गई है. अदालत ने सरकार से शहर के थानों में लावारिस वाहनों के निपटारे के उठाए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

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