तीन बल्ब और दो पंखे चलने वाले घर में आया 4 लाख रुपये का बिल! गरीब परिवार को 50 प्रतिशत में सेटेलमेंट का ऑफर

गरीब परिवार में तीन बल्ब और दो पंखे चलाने वाले शख्स को 4 लाख रुपये का बिल भेजा गया है. इतना ही नहीं इसकी जांच की गुहार लगाई गई तो मामला सेटेलमेंट तक पहुंचा और 50 प्रतिशत में सेटेलमेंट का ऑफर दिया गया है.

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Rajasthan Electricity Bill: राजस्थान में बिजली की किल्लत से काफी परेशान रहते हैं. गर्मी आते ही लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन एक परिवार को बिजली कम जलाने पर बिल की मार पड़ी है. घर में तीन बल्ब और दो पंखे चलाने वाले शख्स को 4 लाख रुपये का बिल भेजा गया है. इतना ही नहीं इसकी जांच की गुहार लगाई गई तो मामला सेटेलमेंट तक पहुंचा और 50 प्रतिशत में सेटेलमेंट का ऑफर दिया गया है. यानी उसे 2 लाख रुपये देने होंगे. मामला किशनगढ़ का है. परिवार का दावा है कि बिल के तनाव और आर्थिक सदमे की वजह से उसके पिता की मौत हो गई.

किशनगढ़ शहर के निकटवर्ती नया गांव में एक सामान्य मजदूर परिवार पर बिजली विभाग का लाखों रुपए का बिल आफत बनकर टूट पड़ा. दो कमरों के छोटे से मकान में रहने वाले गणेश गुर्जर को जुलाई 2024 में 3 लाख 28 हजार रुपये का बिजली बिल थमा दिया गया. समय पर समाधान नहीं होने और सरचार्ज जुड़ने के साथ यह राशि बढ़कर 3 लाख 92 हजार 533 रुपये तक पहुंच गई.

मजदूरी कर परिवार करता है पालन-पोषण

परिवार का दावा है कि घर में महज तीन बल्ब और दो पंखे ही चलते हैं. ऐसे में लाखों का बिल समझ से परे है. गणेश गुर्जर, जो मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, कहते हैं कि “इतनी बड़ी रकम भरना मेरे बस से बाहर है. शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हुई.”

बिल का सदमा और पिता की मौत का आरोप

गणेश का आरोप है कि भारी-भरकम बिल देखकर उनके पिता रामकरण गुर्जर सदमे में आ गए थे. कुछ ही दिनों में उनकी तबीयत बिगड़ी और बाद में उनका निधन हो गया. परिवार का कहना है कि आर्थिक तनाव और मानसिक दबाव ने घर की खुशियां छीन लीं. अब परिवार कर्ज, चिंता और असमंजस के बीच न्याय की आस लगाए बैठा है.

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पीड़ित गणेश गुर्जर

मीटर जांच में ‘ओके' की रिपोर्ट

दूसरी ओर, विद्युत विभाग के एईएन जितेंद्र यादव का कहना है कि करीब डेढ़ साल पहले मीटर की रीडिंग असामान्य रूप से अधिक आई थी. उपभोक्ता की शिकायत पर मीटर को टेस्टिंग के लिए अजमेर भेजा गया, जहां रिपोर्ट में मीटर ‘ओके' पाया गया. विभाग का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद उपभोक्ता को राशि जमा करने और सेटलमेंट की प्रक्रिया अपनाने को कहा गया था, लेकिन वह आगे की कार्यवाही के लिए नहीं आया.

यादव के अनुसार, उपभोक्ता उच्च अधिकारियों के समक्ष ‘ग्रीवांस रिड्रेसल' फॉर्म भरकर राहत की मांग कर सकता था, जिसमें 30 से 50 प्रतिशत तक राशि जमा कर सुनवाई का प्रावधान है. निर्धारित प्रक्रिया पूरी न करने पर विभाग ने कनेक्शन काटने की कार्रवाई की.

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