Rajasthan: 1015 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का खेल उजागर, कलेक्टर की 19 पन्नों की रिपोर्ट से सियासी भूचाल

राजस्थान के प्रतापगढ़ में भू माफिया नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कलेक्टर की 19 पन्नों की रिपोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही राजनीतिक गठजोड़ और अवैध भूमि कारोबार की परतें खोल दी हैं. प्रदेश स्तर पर कड़ी कार्रवाई के संकेत हैं.

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जिला कलेक्टर डॉ अंजलि राजोरिया.

Rajasthan News: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में सरकारी जमीनों के अवैध आवंटन और नियमों की अनदेखी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. जिला कलेक्टर डॉ अंजलि राजोरिया की 19 पन्नों की रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. रिपोर्ट में भू माफिया तस्करों और प्रभावशाली लोगों के गठजोड़ की विस्तार से जानकारी दी गई है.

1015 बीघा राजकीय भूमि पर गंभीर सवाल

जांच में सामने आया कि प्रतापगढ़ शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 1015 बीघा राजकीय भूमि के 87 मामलों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं. राष्ट्रीय राजमार्ग और बायपास से सटी कीमती जमीनें कामदार और डमी काश्तकारों के नाम आवंटित की गईं. बाद में इन्हें निजी कॉलोनियों और व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ.

सरकारी अभियानों का दुरुपयोग

प्रशासन गांवों के संग अभियान और प्रशासन शहरों के संग अभियान 2021 22 का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया. इन अभियानों के जरिए नियमों को दरकिनार कर भूमि आवंटन किए गए. अब राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 और कृषि भूमि आवंटन नियम 1970 के तहत कई आवंटन निरस्त किए जा रहे हैं.

नगर परिषद क्षेत्र में भी गड़बड़ियां

नगर परिषद प्रतापगढ़ में भी अवैध पट्टों और निलामी के मामले सामने आए हैं. आरोप है कि प्रभावशाली लोगों ने अपने और परिचितों के नाम पर भूखंड आवंटित कर बाद में असली लाभार्थियों को सौंप दिए. तत्कालीन सभापति पार्षदों और उनके परिजनों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं.

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प्राकृतिक नाले पर अतिक्रमण

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि शहर के बीच से गुजरने वाले प्राकृतिक नाले को ढककर उस पर निर्माण कर दिया गया. नाला भूमि पर बनाए गए तीन आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों की निलामी बाद में निरस्त की गई. इसके अलावा मानपुरा क्षेत्र में जारी 31 अवैध पट्टे भी रद्द किए गए.

विशेष शाखा की रिपोर्ट में नाम

राजस्थान पुलिस की विशेष शाखा की रिपोर्ट में भी अवैध भूमि आवंटन मामलों में कुछ पार्षदों स्थानीय व्यवसायियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है. इस रिपोर्ट को मुख्य सचिव को भेजा गया है.

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सोशल मीडिया पर पद का दुरुपयोग

कुछ लोग वर्तमान में किसी पद पर न होने के बावजूद खुद को पार्षद या सभापति बताकर सोशल मीडिया पर प्रभाव दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. इस मामले में पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है.

आत्महत्या प्रकरण ने बढ़ाई गंभीरता

भूमि लेनदेन से जुड़े दबाव के कारण समाजसेवी मुस्तफा बोहरा की आत्महत्या का मामला भी इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाता है. जांच में लापरवाही और उच्च न्यायालय की गाइडलाइंस के पालन न होने के आरोप लगे हैं.

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प्रदेश स्तर पर कार्रवाई के संकेत

कलेक्टर की रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है. उच्च स्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. अब सबकी नजर इस पर है कि दोषियों पर कब और कैसे कार्रवाई होती है.

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