Rajasthan: राजस्थान में कड़ाके की ठंड ने ली 20 बछड़ों की जान, गांव में पसरा सन्नाटा

खेतड़ी उपखंड की मांदरी ग्राम पंचायत के ककराय जोहड़ गांव का है, जहां भीषण शीतलहर के चलते खुले में रात गुजार रहे 20 छोटे बछड़ों की दर्दनाक मौत हो गई.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

Kehtri News: राजस्थान में इन दिनों पड़ रही हाड़ कंपा देने वाली ठंड न केवल इंसानों के लिए, बल्कि बेजुबान जानवरों के लिए भी काल बन गई है. ताजा मामला खेतड़ी उपखंड की मांदरी ग्राम पंचायत के ककराय जोहड़ गांव का है, जहां भीषण शीतलहर के चलते खुले में रात गुजार रहे 20 छोटे बछड़ों की दर्दनाक मौत हो गई. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में गौवंश की मृत्यु से पूरे इलाके में हड़कंप का माहौल है.

 20 बछड़े मृत अवस्था में मिले

ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार और रविवार की रात तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई. सुबह जब ग्रामीण उठे, तो उन्हें गांव के अलग-अलग स्थानों पर 20 बछड़े मृत अवस्था में मिले. देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और गौ रक्षा दल के कार्यकर्ताओं को सूचित किया गया. सूचना मिलते ही प्रशासन में हलचल तेज हो गई. उपअधीक्षक जुल्फिकार अली और थानाधिकारी मोहनलाल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. शिवकुमार सैनी भी डॉक्टरों की टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.

 प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता

वही मेडिकल टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 11 अन्य बीमार बछड़ों का उपचार शुरू किया. संक्रमण और बीमारी न फैले, इसके लिए प्रशासन ने जेसीबी की मदद से मृत बछड़ों को जमीन में दफनाया.

मौत का मुख्य कारण

पशुपालन विभाग की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि छोटे बछड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम होती है. रात भर खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड और ओस के बीच बैठने के कारण वे 'हाइपोथर्मिया' का शिकार हो गए, जिससे उनकी जान चली गई.

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 पशुपालकों के लिए जरूरी सलाह

 पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र के सभी किसानों और पशुपालकों के लिए गाइडलाइन जारी की है. जिसके तहत रात के समय पशुओं, विशेषकर छोटे बछड़ों को खुले में न बांधें. उन्हें चारों तरफ से ढंके हुए बाड़े में रखें. फर्श पर पुआल, सूखी घास या जूट की बोरियां बिछाएं ताकि जमीन की ठंड पशुओं तक न पहुंचे. ठंड से लड़ने के लिए पशुओं को गर्म तासीर वाला पौष्टिक चारा और पर्याप्त मात्रा में दाना दें. छोटे बछड़ों को पुराने बोरे या कपड़ों से बनी 'झूल' पहनाकर रखें.

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