Oran Gauchar Land Protection Movement: ओरण- गोचर भूमि बचाने के लिए लोग लम्बे वक्त से संघर्ष कर रहे हैं. ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग को लेकर पर्यावरण प्रेमी 725 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं. यात्रा के जिस पड़ाव पर ठहरते हैं, वहीं देवी-देवताओं का स्मरण कर भजन-कीर्तन करते हैं. पैदल यात्री इसे ही ऊर्जा का स्त्रोत बता रहे हैं. 'टीम ओरण' की यह पदयात्रा ओरण, गोचर, तालाबों कैचमेंट सहित विभिन्न पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर है. सूर्योंदय के साथ शुरू होने वाली यह यात्रा शाम होते-होते किसी मंदिर या गांव के किसी स्थल पर अपना पड़ाव डाल देती हैं. युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के लोग हक की लड़ाई के बीच एक जाजम पर नजर आए.
प्रशासन ने 3 महीने में कार्यवाही की कही थी बात
पर्यावरण सुमेर सिंह का कहना है कि जैसलमेर के हर गांव में ओरण, गोचर, कुएं, तालाब और बावड़िया धरोहर हैं. वो विकास के चलते विनाश के हत्थे चढ़ रही हैं. लेकिन हम इसके संरक्षण के लिए प्रयासरत हैं. पिछली बार जिला प्रशासन ने ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने व अन्य मांगो को पूरा करने के लिए तीन माह का समय मांगा था. डेडलाइन खत्म होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. अब हम हमारी मांगे पूरी करने के लिए जयपुर जा रहे हैं.
बच्चे से लेकर 75 साल के बुजुर्ग भी शामिल
टीम ओरण से जुड़े हरीश धंदेव बताते हैं, "पदयात्रा समूह में 10 साल के बच्चों से लेकर 75 साल के बुजुर्ग भी चल रहे हैं. सरकार से हम सबको आशा है कि वह हमारी मांगे मानेगी. हम विकास के खिलाफ नहीं है. हम सतत विकास के साथ है. आज ह्मारे पास जो संसाधन धरोहरों के रूप में है, उसे नष्ट नही करना है."
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