जल जीवन मिशन घोटाले में 20 अधिकारियों के नाम, ACB को रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल समेत कई की तलाश

जल जीवन मिशन घोटाले में मंगलवार को फिर से गिरफ्तारियां शुरू हो गई. राजस्थान समेत कई राज्यों में करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान एसीबी ने चीफ इंजीनियर समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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जल जीवन मिशन घोटाले में ACB को रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल समेत कई की तलाश

राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है. यह घोटाला राजस्थान की राजनीति का एक ऐसा गबन है, जिसकी आंच में पूर्व मंत्री और आईएएस स्तर तक के अधिकारी आ रहे हैं. मामले में एसीबी, ईडी और सीबीआई की टीम जांच कर रही है. मंगलवार को छापेमारी के दौरान चीफ इंजीनियर समेत 9 लोगों को गिरफ्तार करने के बाद एसीबी ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले मुकेश पाठक को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से रात में पकड़ा. मुकेश को छोड़कर सभी 9 आरोपियों की बुधवार को कोर्ट में पेश हुई. इस दौरान एसीबी की ओर से 5 दिन की रिमांड मांगी गई, पर कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड मंजूर की. कोर्ट में बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि जिन टेंडरों की बात हो रही है, वे कभी एक्जीक्यूट ही नहीं हुए. सभी स्तर पर वे वर्क ऑर्डर वेरिफाई किए गए थे. 

मोबाइल बंद करके गायब IAS सुबोध अग्रवाल

इस घोटाले में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल की तलाश एसीबी को है. एसीबी की टीम ने जब मंगलवार (17 फरवरी) को सुबोध अग्रवाल के दिल्ली और जयपुर स्थित घर पर रेड की तो पता चला वे रात को 9 बजे ही मोबाइल बंद करके निकल गए थे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने मुख्यमंत्री और एसीबी डीजी को पत्र लिखकर खुद को बेगुनाह बताया है. आईएएस सुबोध अग्रवाल के अलावा विभाग में एसई जितेंद्र शर्मा व तत्कालीन एससी मुकेश गोयल की तलाश भी एसीबी कर रही है. 

जांच कमेटी ने 20 अधिकारियों को माना जिम्मेदार

मामले में हुई जांच के मुताबिक, इरकॉन कंपनी के नाम पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कर करोड़ों के टेंडर हासिल किए गए. जलदाय विभाग की जांच कमेटी ने पूरे मामले के लिए 20 अधिकारियों को जिम्मेदार माना. विभाग को 2023 में जल जीवन मिशन योजना के तहत जयपुर रीजन-प्रथम, जयपुर रीजन-द्वितीय, नागौर प्रोजेक्ट समेत अन्य क्षेत्रों व प्रोजेक्ट विंग में 2000 करोड़ से अधिक के काम फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर देने और घटिया निर्माण को लेकर कई शिकायतें मिली थी. इस मामले में मेसर्स श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी (शाहपुरा) और मेसर्स श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी पर आरोप है कि दोनों फर्मों ने इरकॉन के नाम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर 900 करोड़ के काम हासिल किए. 

किरोड़ी के धरने से मामले ने पकड़ा था तूल

पूरा मामला 20 जून 2023 से शुरू हुआ. जब डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने राजधानी जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर दो दिन तक धरना दिया. मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा. कई अन्य नेता भी अशोक नगर थाने पहुंचे. जमकर राजनीतिक बयानबाजी हुई. 2023 के विधानसभा चुनाव के वक्त भी यह मामला सियासी गलियारों में खूब चर्चा का विषय बना.

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24 अप्रैल 2025 को इसी मामले में ईडी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को करीब 8 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था. सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिसम्बर 2025 को पूर्व मंत्री को जमानत दी. अभी वे जमानत पर इस मामले में बाहर है. अब मंगलवार को एक बार फिर से जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया. राजस्थान से बाहर जाकर दिल्ली, छत्तीसगढ़ और झारखंड में करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान एसीबी ने कल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें कई चीफ इंजीनियर, वित्तीय सलाहकार और फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले लोग शामिल हैं. 

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