Rajasthan News: राजस्थान में करौली जिले की नादौती तहसील के एक छोटे से गांव हरलोदा के रहने वाले जे.एस. मीणा ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर भारत सरकार के रेलवे विभाग में 'चीफ ट्रैक इंजीनियर' जैसा महत्वपूर्ण पद हासिल किया है. एक साधारण किसान परिवार में जन्मे मीणा की इस सफलता ने न केवल उनके गांव बल्कि पूरे प्रदेश में खुशी की लहर पैदा कर दी है.
साधारण परिवेश और असाधारण संघर्ष
जे.एस. मीणा का बचपन गांव की उन्हीं गलियों और खेतों में बीता जहां उनके पिता मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण करते थे. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया. उनकी लगन का ही परिणाम था कि उन्होंने वर्ष 1995 बैच की यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में सफलता हासिल की और रेलवे की प्रतिष्ठित सेवाओं का हिस्सा बने.
सिकंदराबाद से शुरू हुआ सफलता का सफर
रेलवे में उनके करियर की शुरुआत हैदराबाद जोन के सिकंदराबाद साउथ डिवीजन में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर हुई थी. अपनी तकनीकी कुशलता और बेहतरीन कार्यशैली के कारण उन्होंने लगातार तरक्की की. वे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों जैसे डिविजनल इंजीनियर और सीनियर डीवीजी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. अब नई जिम्मेदारी के तहत उनके पास रेलवे ट्रैक के प्रबंधन और तीनों मंडलों की निगरानी का अहम जिम्मा होगा.
युवाओं के लिए बने मिसाल
जे.एस. मीणा की यह पदोन्नति उन युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी को अपनी सफलता में बाधक मानते हैं. ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर रेलवे के इस शीर्ष पद तक पहुंचना यह साबित करता है कि यदि इरादे मजबूत हों तो सफलता कदम चूमती है. खबर मिलते ही गांव हरलोदा और नादौती क्षेत्र में जश्न का माहौल है और लोग उन्हें अपनी माटी का गौरव बता रहे हैं.
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