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"पायलट का CM बनना तो विधायकों को मंजूर नहीं था, कोई बगावत नहीं हुई", गहलोत ने खुलकर बताई 25 सितंबर वाली बात

अशोक गहलोत के बयान से कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं. उन्होंने पायलट पर तंज भी कसा और नसीहत भी दी. इस बयान के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं.

"पायलट का CM बनना तो विधायकों को मंजूर नहीं था, कोई बगावत नहीं हुई", गहलोत ने खुलकर बताई 25 सितंबर वाली बात
गहलोत के बयान के बाद राजस्थान की सियासत गरमा गई है.

सचिन पायलट और मानेसर प्रकरण को लेकर अशोक गहलोत के ताजा बयान ने हलचल मचा दी है. बीते दिन (7 जून) पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बेबाकी से कई बातें कहीं. चाहे साल 2020 की पायलट गुट का गहलोत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना हो या 25 सितंबर 2022 के दौरान विधायकों का सामूहिक इस्तीफा. गहलोत ने कई पुराने किस्सों को एक बार फिर छेड़ दिया है. इसी बीच, उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि 25 सितंबर की घटना बगावत नहीं थी, बल्कि विधायक पायलट के पक्ष में नहीं थे. जानिए उन्होंने क्या कहा. 

"सीएम के दावेदार के साथ तो विधायक खड़े रहते हैं"

गहलोत ने अपनी बात को पुख्ता करते हुए साफ किया कि जब भी सीएम बदलता है, विधायक नए चेहरे के साथ होते हैं. उनका कहना था, "कभी भी हाईकमान ने मुख्यमंत्री बदलने को लेकर फैसला किया 90 फीसदी विधायक नए मुख्यमंत्री के साथ चले जाते हैं. नए मुख्यमंत्री की संभावना को देखते हुए मंत्री बनने की चाहत में विधायक चले जाते हैं. क्योंकि वो जानते हैं कि अब हमारा काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेगा. कैप्टन अमरिंदर सिंह हो या कोई और, हमेशा हमने यही देखा है."

दावा- माहौल ऐसा था कि 100 विधायक इकट्ठे हो गए 

दरअसल, गहलोत का इशारा इस ओर था कि जब पायलट का नाम सीएम की दौड़ में चल पड़ा था तो विधायकों ने बगावत क्यों की? साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनका नाम नहीं चल रहा था, बल्कि कुछ दोस्तों ने मीडिया में चलवा दिया. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "इनके खुद के लोगों ने चला दिया, ऐसा माहौल बन गया कि 100 लोग इकट्ठे हो गए. विधायकों ने कहा कि अशोक गहलोत अध्यक्ष बनने जा रहे हैं तो नया मुख्यमंत्री बने. लेकिन हमने जो वफादारी हाईकमान के साथ दिखाई और होटलों में बंद रहे हैं. हम में 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए." 

गहलोत का सवाल- बगावत की होती तो सीएम रह पाता? 

उन्होंने दावा किया कि विधायकों को पायलट का सीएम बनना मंजूर नहीं था. क्योंकि वो मानेसर जाने वाले विधायकों में शामिल थे. ऐसे में पार्टी के भीतर उन्हें लेकर सहमति नहीं थी. इसी घटनाक्रम को तोड़-मरोड़ कर पेश कर दिया गया कि आलाकमान के खिलाफ बगावत हुई है. अगर ऐसा होता तो क्या मैं मुख्यमंत्री रह पाता? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए.

बोले- आज भी उनको बच्चे की तरह मानता हूं

पायलट पर सीधा बयान देते हुए गहलोत ने कहा कि उनको (पायलट) भी राजनीति में करीब 15-20 साल हो गए हैं. वो भी अनुभव प्राप्त हो चुके हैं. हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं. हम तो बचपन से ही स्नेह रखते हैं. मैं तो आज भी उनको बच्चे की तरह मानता हूं. अब राजनीति में उन्हें कौन गाइड कर रहा है, पता नहीं. 

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