कोटा और बीकानेर के बाद जोधपुर में भी 8 प्रसूताओं की तबियत बिगड़ने के मामले में नया अपडेट है. एक महिला को एम्स रेफर किया गया है. वहीं, इस मामले में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी जानकारी दी है. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जोधपुर, बीकानेर और कोटा के तीनों मामले अलग है. उनके मुताबिक, एम्स में रेफर महिला हार्ट पेशेंट है. जबकि एक महिला पीलिया से पीड़ित है.
एक अन्य महिला को भी एम्स रेफर करने की तैयारी
गजेन्द्र सिंह खींवसर ने जानकारी दी कि 15 मई को एक महिला को भर्ती किया गया. महीनेभर तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद उसकी मृत्यु हो गई. इसके अलावा भी कई मामले आए, जो कॉम्प्लिकेटेड थे. जोधपुर में सभी रेफर केस आते हैं. फिलहाल वहां भर्ती 6 मरीज नॉर्मल है. उन्होंने बताया कि पीलिया से पीड़ित होने के चलते एक अन्य महिला को भी एम्स रेफर करने की तैयारी है.
निजी हॉस्पिटल में धक्का खाने के बाद मरीज आते हैं- खींवसर
स्वास्थ्य मंत्री ने जेके लोन हॉस्पिटल, कोटा के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हर साल 6 हजार डिलीवरी होती है और इसमें 3 हजार नॉर्मल होती है और 3 हजार सिजेरियन. जबकि डेथ रेट 0.01% है. अगर हॉस्पिटल की व्यवस्था पर विश्वास नहीं होता है तो मरीज क्यों जाते? हॉस्पिटल में इमरजेंसी केस आते हैं, फ्रेश केस नहीं आते. वह कहीं ना कहीं धक्का खाकर आते हैं. जब प्राइवेट पैसा मांगते हैं या खराब कंडीशन होती है तो मरीज आते हैं.
सिजेरियन डिलीवरी पर बोले- महिलाएं दर्द सहन नहीं करना चाहती
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के सवाल कहा कि आजकल वैसे भी सिजेरियन डिलीवरी को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है, युवा पीढ़ी दर्द नहीं सहन करना चाहती. सिजेरियन में ब्लीडिंग बहुत होती है और किडनी फेल होती है. हम भी 25% इंजेक्शन मार्केट से खरीदते हैं. अभी जो ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में पाया गया, उसकी फैक्ट्री को बंद कर दिया है.
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