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राजस्थान माइनिंग के मामले में देश में अव्वल, ढाई साल में 102 ब्लॉक का ऑक्शन

राजस्थान में साल 2024-25 के दौरान 34 ब्लॉक और वर्ष 2025-26 में 39 प्रधान खनिज ब्लॉक नीलाम किए गए. इस साल साढ़े तीन 3 महीने के भीतर ही 14 ब्लॉक की नीलामी हो चुकी है.

राजस्थान माइनिंग के मामले में देश में अव्वल, ढाई साल में 102 ब्लॉक का ऑक्शन
खनन के मामले में राजस्थान देश में नंबर-1.

राजस्थान प्रधान खनिजों की ई-नीलामी में देशभर में पहले स्थान पर पहुंच गया है. प्रदेश में अब तक 141 प्रधान खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी हो चुकी है. इनमें से पिछले ढाई साल में ही 102 ब्लॉक नीलाम किए गए हैं. राज्य सरकार का दावा है कि ई-नीलामी से खनन क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ सरकार के राजस्व में भी इजाफा हुआ है. साथ ही वैध खनन को बढ़ावा मिलने से अवैध खनन पर रोक लगाने में मदद मिली है. नई नीलामी व्यवस्था लागू होने से लेकर 14 दिसंबर 2023 तक प्रदेश में केवल 39 प्रधान खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई थी. साल 2024-25 में 34 ब्लॉक और वर्ष 2025-26 में 39 प्रधान खनिज ब्लॉक नीलाम किए गए. इस वित्तीय वर्ष के शुरुआती साढ़े तीन महीने में ही 14 ब्लॉक नीलाम हो चुके हैं. वहीं, खान एवं भूविज्ञान विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में 55 प्रधान खनिज ब्लॉकों की नीलामी की कार्ययोजना तैयार की है.

सबसे ज्यादा 101 लाइमस्टोन ब्लॉक नीलाम

राज्य में अब तक नीलाम किए गए 141 प्रधान खनिज ब्लॉकों में सबसे ज्यादा 101 लाइमस्टोन ब्लॉक हैं. इसके अलावा 13 आयरन, 8 बेस मेटल, 4 सिलियस अर्थ 3 मैंगनीज, 2 गोल्ड, 2 पोटाश एवं हैलाइट, 4 रेयर अर्थ एलिमेंट, 1-1 गार्नेट, एमरल्ड, फ्लोराइट और रॉक फास्फेट के ब्लॉक नीलाम किए गए हैं. 141 नीलाम किए गए ब्लॉकों में से 105 ब्लॉकों की माइनिंग लीज और 30 ब्लॉकों की कंपोजिट लाइसेंस के लिए नीलामी हुई है. एक ब्लॉक की एक्सप्लोरेशन लाइसेंस के लिए नीलामी की गई. वहीं सामरिक महत्व के 7 क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉकों की नीलामी केंद्र सरकार ने की है.

नीलामी के बाद अब ब्लॉक को चालू कराने पर जोर

खान एवं भूविज्ञान विभाग अब नीलाम किए गए ब्लॉकों को जल्द से जल्द संचालन में लाने पर फोकस कर रहा है. इसके लिए पोस्ट ऑक्शन फैसिलिटेशन सेल बनाया गया है. यह सेल पर्यावरण स्वीकृति सहित अन्य आवश्यक अनुमतियां दिलाने में समन्वय कर रहा है. 

विभाग खुद कर रहा मॉनिटरिंग

राजस्थान में खान एवं भूविज्ञान विभाग खुद ही ब्लॉक तैयार करने से लेकर ई-नीलामी तक की पूरी प्रक्रिया कर रहा है. इससे एक ओर प्रक्रिया में विभागीय विशेषज्ञता का इस्तेमाल हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रांजेक्शन एडवाइजर पर होने वाला खर्च भी बच रहा है. सरकार का दावा है कि इससे राजस्व की बचत के साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है.

खनिज खोज से लेकर ब्लॉक तैयार करने और ई-नीलामी तक की प्रक्रिया की नियमित निगरानी विभाग की ओर से की जा रही है. इससे खनिज खोज और नीलामी प्रक्रिया में तेजी आई है. अन्य राज्यों में खनिज ब्लॉक तैयार करने और ई-नीलामी की प्रक्रिया के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर की सेवाएं ली जाती हैं.

सरकार का कहना है कि खनिज ब्लॉकों की पारदर्शी ई-नीलामी से प्रदेश में निवेश बढ़ रहा है. नीलाम ब्लॉकों के संचालन में आने के बाद खनन, परिवहन, प्रसंस्करण और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे. साथ ही राज्य सरकार को रॉयल्टी और अन्य मदों से राजस्व मिलेगा.

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