किताबें हटाने पर घमासान, डोटासरा के आरोपों पर दिलावर का पलटवार बोले- कैसे बच्चों को गलत इतिहास पढ़ाओगे?

राजस्थान में स्कूलों की इतिहास की किताबें हटाने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं. डोटासरा ने इसे इतिहास से छेड़छाड़ बताया तो शिक्षा मंत्री दिलावर ने जवाब देते हुए इसे सुधार बताया है.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
राजस्थान में स्कूलों की इतिहास की किताबें हटाने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है.

Rajasthan News:  राजस्थान में शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा 9 से 12 तक की चार महत्वपूर्ण किताबों को हटाने के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. इनमें राजस्थान का इतिहास संस्कृति और आजादी के बाद का भारत जैसे विषय शामिल थे. इस कदम को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं.

डोटासरा का हमला, कहा इतिहास से छेड़छाड़

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार के फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सिलेबस बदलाव नहीं बल्कि इतिहास और सोच पर हमला है. उनके अनुसार सरकार नई पीढ़ी को अधूरा सच पढ़ाना चाहती है. उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर इन किताबों में ऐसी क्या कमी थी कि उन्हें हटाना पड़ा.

Advertisement

दिलावर का पलटवार, बोले सही इतिहास जरूरी

वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने डोटासरा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि बच्चों को सही और पूर्ण जानकारी मिलनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि पहले की किताबों में कई महान नेताओं को उचित स्थान नहीं दिया गया.

दिलावर ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री, सरदार वल्लभभाई पटेल और भीमराव अंबेडकर जैसे नेताओं के योगदान को सही तरीके से नहीं दिखाया गया. उन्होंने कहा कि अंबेडकर को सिर्फ एक लाइन में सीमित करना गलत है.

नए इतिहास में क्या होगा बदलाव

दिलावर ने यह भी कहा कि आजादी के बाद के भारत का इतिहास पढ़ाते समय धारा 370 हटाने जैसे अहम फैसलों का जिक्र होना चाहिए. साथ ही अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कामों की तुलना भी जरूरी है ताकि छात्रों को संतुलित जानकारी मिल सके.

इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि शिक्षा और इतिहास अब राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं. एक तरफ कांग्रेस इसे विचारधारा का मुद्दा बता रही है तो दूसरी ओर भाजपा इसे सुधार और संतुलन की कोशिश बता रही है.

Advertisement

यह भी पढ़ें- महिला आरक्षण बिल पर कैबिनेट मंत्री का बड़ा बयान- "भविष्य में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने पर भी विचार"