Rajasthan Politics: राजस्थान में कांग्रेस-बीजेपी के बीच छिड़ा 'डिजिटल वॉर', आमने-सामने आए डोटासरा-राठौड़

राजेंद्र राठौड़ और गोविंद डोटासरा के बीच ये जुबानी जंग राजस्थान विधानसभा चुनाव के वक्त शुरू हुई थी. तब डोटासरा ने राठौड़ पर काफी जुबानी हमले किए थे. अपनी सीट चूरू को छोड़कर तारानगर जाने पर भी डोटासरा ने राठौड़ पर जमकर सियासी शब्द बाण छोड़े थे.

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कांग्रेस नेता गोविन्द सिंह डोटासरा और भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़

Rajasthan News: राजस्थान में दो नेताओं की सियासी लड़ाई ने अब डिजिटल रूप ले लिया है. इस वक्त राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आमने सामने हैं. दोनों की लड़ाई तू-तू मैं-मैं पर आ गई है, और अब वे एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर निशाना साध रहे हैं.

गुरुवार को डोटासरा का नाम लिए बिना राजेंद्र राठौड़ ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, 'युवा आज भी पूछ रहे हैं - एक ही परिवार से 4-4 आरएएस बनना संयोग था या प्रयोग?'. इस पर डोटासरा ने पलटवार करते हुए लिखा, 'हमारे यहां बच्चों को मेहनत करने और पढ़ने की शिक्षा दी जाती है, टोल, बजरी और शराब के धंधे की नहीं '.

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गौरतलब है कि, गोविन्द सिंह डोटासरा के परिवार में एक साथ 4 लोगों का राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में चयन हुआ था. इस पर कई सवाल भी उठे थे. इन चार लोगों में डोटासरा के बेटे का भी नाम था जो RAS में चयनित हुए थे. राठौड़ और डोटासरा की ज़ुबानी जंग राजस्थान विधानसभा चुनाव से शुरु हुई थी. तब डोटासरा ने राठौड़ पर काफी ज़ुबानी हमले किये थे. अपनी सीट चूरू को छोड़कर तारानगर जाने पर भी डोटासरा ने राठौड़ पर जमकर निशाना साधा था. 

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गुरुवार को राठौड़ ने ट्वीट करते लिखा, इतना भी गुमान ना कर अपनी जीत पर ऐ बेखबर, शहर में तेरी जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं. सीकर वाले नेताजी, इतना भी अहंकार ठीक नहीं है. हार और जीत एक सिक्के के दो पहलू है. अभी एक परीक्षा और बाकी है. युवा आज भी पूछ रहे हैं - एक ही परिवार से 4-4 आरएएस बनना संयोग था या प्रयोग ? युवाओं के सपनों के सौदागरों को माफ नहीं किया जाएगा. जवाब तो देना ही पड़ेगा' 

इसके जवाब में राठौड़ की पोस्ट को शेयर करते गोविन्द सिंह डोटसारा ने लिखा, गलतफहमी ना पाल, ये जनता का पर्चा है तेरे सिर्फ़ टोल, बजरी, भूमाफिया होने की चर्चा है काश. अवैध अड्डों से इतर तारानगर वाले नेताजी की जनता में भी चर्चा रहती तो जवाब सदन में मिलता. और हां. अहंकार नहीं, स्वाभिमान है! हमारे यहां बच्चों को मेहनत करने और पढ़ने की शिक्षा दी जाती है, टोल, बजरी और शराब के धंधे की नहीं. अगली परीक्षा के लिए शुभकामनाएं.

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