Rajasthan News: राजस्थान में प्राइवेट बस ऑपरेटर्स और सरकार के बीच छिड़ा विवाद (Rajasthan Private Bus Strike) अब आर-पार की जंग में बदल गया है. सरकार के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद आज दूसरे दिन भी प्रदेश की करीब 35000 स्लीपर, स्टेज कैरिज और लोक परिवहन बसों के पहिए थमे हुए हैं. इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर आगामी अजमेर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली (PM Modi Ajmer Rally) पर पड़ने वाला है, क्योंकि ऑपरेटर्स ने रैली के लिए बसें देने से साफ इनकार कर दिया है.
डीडवाना से कोटा तक आक्रोश
ताजा हालों की बात करें तो बुधवार को सालासर बस स्टैंड पर बस संचालकों ने जमकर नारेबाजी की है. ऑपरेटर्स का सीधा आरोप है कि आरटीओ धर्मेंद्र चौधरी और निरीक्षक राजेश चौधरी नियमों के विपरीत भारी-भरकम चालान काट रहे हैं. नागौर एसोसिएशन ने भी कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है. वहीं करौली के संचालकों (मुकेश शर्मा उर्फ मुक्ति पांडे) ने बताया कि टेम्पो चालकों की दादागिरी और फिटनेस के नाम पर होने वाली प्रताड़ना से बस मालिक परेशान हैं. फिटनेस के लिए दूसरे जिले में जाते समय टोल पर ही 5 से 10 हजार रुपये का ऑटोमैटिक चालान कट जाता है. उधर, गंगापुर सिटी से रोजाना चलने वाली 350 बसें खड़ी रहीं. कोटा संभाग में भी 500 बसों के पहिए थमने से बस स्टैंडों पर सन्नाटा पसरा है. रोडवेज बसों में क्षमता से अधिक यात्री जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं.
प्राइवेट बस ऑपरेटर्स की मांगें क्या हैं?
- डीडवाना के आरटीओ धर्मेंद्र चौधरी और निरीक्षक राजेश चौधरी को तुरंत एपीओ (APO) किया जाए.
- चेकिंग के दौरान फिजिकल कागजों के बजाय सरकारी पोर्टल के ऑनलाइन दस्तावेजों को ही मान्यता मिले.
- करौली जैसे जिलों के संचालकों को फिटनेस सुविधा जिला मुख्यालय पर ही मिले ताकि दूसरे शहर जाने पर टोल पर चालान न कटे.
- स्टेज कैरिज और पर्यटक बसों की छत पर जाल (कैरियर) लगाने और सामान ढोने की स्पष्ट अनुमति मिले.
- परिवहन विभाग द्वारा बिना सुनवाई बसों को सीज करने और भारी-भरकम स्पेशल रोड टैक्स पर तुरंत रोक लगे.
- टेम्परेरी परमिट (TP) की अवधि अन्य राज्यों की तर्ज पर 24 घंटे की जाए और रैलियों के समय पोर्टल बंद न हो.
- रोडवेज की तर्ज पर निजी बसों के किराए के लिए भी 'उच्च स्तरीय कमेटी' बनाई जाए.
- चुनाव या रैलियों के दौरान रोडवेज और निजी बसों के लिए एक जैसा किराया और नियम लागू हों.
- जिन बसों की आरसी और फिटनेस निलंबित की गई है, उन्हें तुरंत बहाल कर राहत दी जाए.
- बस बॉडी कोड और अन्य नए नियम 1 अप्रैल से ही लागू किए जाएं.
- अन्य राज्यों से आने वाली पुरानी बसों का रजिस्ट्रेशन सुचारू हो और एआईटीपी (AITP) बसों के लिए अलग टैक्स स्लैब बने.
प्रशासन की बढ़ी टेंशन, यात्री बेहाल
निजी बसों के पहिए थमने से रोडवेज बसों पर बोझ बढ़ गया है. बस मालिकों (विजय सिंह, प्रमोद सिंह, लिखमा राम भांभू, गुमान सिंह) का साफ कहना है कि जब तक उनकी 11 जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, यह चक्का जाम जारी रहेगा. अब देखना यह है कि सरकार इस गतिरोध को कैसे दूर करती है और पीएम मोदी की रैली के लिए परिवहन व्यवस्था कैसे सुनिश्चित होती है.
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