सीकर के विकास में एक नया अध्याय, ऐतिहासिक बोलता बालाजी मंदिर को मिलेगा नया रूप

Bolta Balaji Temple: सीकर शहर के प्रसिद्ध माधव सागर तालाब के पास स्थित ऐतिहासिक बोलता बालाजी मंदिर का नवनिर्माण शुरू हो गया है. इस मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया जाएगा और यह शहर का एक नया आकर्षण केंद्र बनेगा.

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मंदिर के नवनिर्माण का शिलान्यास हुआ

Rajasthan News: सीकर शहर के माधव सागर तालाब के तट पर स्थित प्राचीन बोलता बालाजी मंदिर का नवनिर्माण का शिलान्यास आज धूमधाम से संपन्न हुआ. इस ऐतिहासिक अवसर पर कई गणमान्य लोगों ने शिरकत की. मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया जाएगा और यह तीन भागों में बनेगा - गैलरी, हॉल और गर्भगृह. करीब 95 साल पहले माधव सागर तालाब की खुदाई के दौरान बोलता बालाजी की मूर्ति मिली थी.

मान्यता है कि इस मूर्ति से आवाज आती थी, इसलिए इसका नाम बोलता बालाजी पड़ा. तब से यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है.

यह है मंदिर का प्राचीन इतिहास

जानकारी के अनुसार बोलता बालाजी धाम की मूर्ति करीब 95 साल पुरानी बताई जाती है. जो अकाल राहत के कार्य के दौरान माधव सागर तालाब की खुदाई करते समय निकली थी. अकाल के वक्त राव राजा ने आमजन को काम देने के लिए माधव सागर तालाब की खुदाई करवाई थी.

इसी दौरान खुदाई के कामकाज की मॉनिटरिंग करने वाले विलास तिवाडी महाराज भी तालाब के पास ही रहते थे. किदवंती के अनुसार विलास तिवाडी महाराज को तालाब से कुछ आवाज सुनाई देती थी. इस पर उन्होंने राव राजा से तालाब की खुदवाई करवाने की अनुमति ली और खुदाई में बालाजी की यह मूर्ति निकली.

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इसीलिए इस मंदिर का नाम बोलता बालाजी रखा गया. राव राजा माधव सिंह ने यहां छोटा सा मंदिर बनाकर खुदाई में निकली मूर्ति की स्थापना करवाई और मंदिर में सेवा की जिम्मेदारी भी विलास तिवाडी महाराज को दी गई.

बोलता बालाजी मंदिर के नवनिर्माण का महत्व

इस नवनिर्माण के साथ ही सीकर शहर का सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है. माधव सागर तालाब को भी लाल पत्थरों से सजाया जा रहा है. यह परियोजना शहर के विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगी.

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शिलान्यास समारोह

शिलान्यास समारोह में रेवासा धाम के अग्रपीठाधीश्वर श्री श्री 1008 संत राजेंद्र दास जी देवाचार्य, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाडी, सीकर सांसद अमराराम, शहर विधायक राजेंद्र पारीक और नगर परिषद के पदाधिकारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे.

भविष्य की योजनाएं

नगर परिषद का लक्ष्य इस मंदिर को शहर का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल बनाना है. इसके लिए आसपास के क्षेत्र में भी विकास कार्य किए जाएंगे.

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