Rajasthan: राजस्थान का एकल पट्टा प्रकरण, आज राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई में क्या हुआ ? 

कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी को सुबह 10:30 बजे निर्धारित कर दिया. यह प्रकरण जयपुर विकास प्राधिकरण से जुड़े भूमि आवंटन विवाद से संबंधित है, जिसमें पूर्व मंत्री सहित कई नाम शामिल हैं.

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Single lease case: प्रदेश के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण पर आज राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की विशेष एकलपीठ ने शांति धारीवाल व अन्य की याचिकाओं पर विचार करते हुए सुनवाई की. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि शांति धारीवाल की याचिका मेंटेनेबल नहीं है. उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार और कोर्ट के बीच का मामला है, इसमें आरोपी को पिटीशन दायर करने का कोई अधिकार नहीं है.

कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी को सुबह 10:30 बजे निर्धारित कर दिया. यह प्रकरण जयपुर विकास प्राधिकरण से जुड़े भूमि आवंटन विवाद से संबंधित है, जिसमें पूर्व मंत्री सहित कई नाम शामिल हैं.

शांति धारीवाल ने अन्य याचिका लगा रखी है

वहीं, इस मामले में इंटरवेनर अशोक पाठक ने कहा कि मेरा यही कहना है कि कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार ने धारा 321 में प्रार्थना पत्र दिया था. पहले  एफआर पेश की थी, जिसे कोर्ट ने नहीं माना. फिर अभियोजन स्वीकृति वापस लेने के लिए कहा, उसे भी कोर्ट ने खारिज कर दिया. इसके बाद जो रिविजन पेटिशन लगाई है, कोर्ट में उनका कोई आधार ही नहीं है. क्योंकि मुकदमा चलाना और वापस लेने कोर्ट और एसीबी के बीच का मामला है. इसके अलावा शांति धारीवाल ने अन्य याचिका लगा रखी है. वह केस को लंबे समय तक अटकाने का तरीका है. ना उनका एफआईआर में नाम है. ना उन्हें अभियुक्त माना है. तो फिर उनकी याचिका मेंटेनेबल नहींं है.

उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े आरोपी यही चाहते हैं कि केस को टालते रहे ताकि ये सरकार 5 साल जब तक है. तब तक कुछ ना हो. इस सरकार का कार्यकाल निकल जाए.

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क्या है मामला?

दरअसल, जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने 2011 में 29 जून को गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम से एकल पट्टा जारी किया था. इस पट्टे के खिलाफ रामशरण सिंह ने 2013 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत दर्ज कराई थी. एसीबी में शिकायत के बाद उस वक्त के एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी, शैलेंद्र गर्ग के साथ दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी. हालांकि, मामला बढ़ने के बाद विभाग ने 25 मई 2013 को एकल पट्टा रद्द कर दिया था. उस वक्त तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल से भी इस मामले में पूछताछ हुई थी. 

2014 में वसुंधरा राजे सरकार के समय मामले में एसीबी ने चालन भी पेश किया था. सरकार बदलते ही गहलोत सरकार के वक्त एसीबी ने मामले में तीन क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की थी . तीनों रिपोर्ट में सरकार ने इस मामले में पूर्व आईएएस जीएस संधू, पूर्व आरएएस निष्काम दिवाकर और ओंकारमल सैनी को क्लीन चिट दे दी थी.

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