Rajasthan News: राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षा के पेपर लीक और OMR शीट घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है. SOG की ताबड़तोड़ कार्रवाई में उस गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सालों तक युवाओं के भविष्य के साथ खुला खेल खेला. 2018 प्रयोगशाला सहायक, कृषि पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी महिला सुपरवाइजर समेत कई भर्तियों में नंबर बढ़ाकर नौकरी दिलाने का गोरखधंधा चल रहा था.
नंबरों में हेराफेरी कर पास कराए अभ्यर्थी
दरअसल, एसओजी ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो OMR शीट स्कैनिंग के दौरान नंबरों में हेराफेरी कर फर्जी तरीके से अभ्यर्थियों को पास करा रहा था. इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. राघव लिमिटेड कंपनी के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़ और शदान खान को दबोचा गया है.
इसके साथ ही राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के टेक्निकल हेड संजय माथुर, प्रोग्रामर प्रदीप गंगवाल और एक अभ्यर्थी पूनम को भी गिरफ्तार किया गया है. एसओजी की जांच में सामने आया है कि साल 2018 में हुई आंगनवाड़ी महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा के दौरान राघव लिमिटेड कंपनी को OMR स्कैनिंग की जिम्मेदारी दी गई थी. इसी प्रक्रिया में आरोपियों ने बड़े स्तर पर धांधली की.
SOG के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2018 की पर्यवेक्षक (महिला अधिकारिता), प्रयोगशाला सहायक और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ा है. इन तीनों भर्ती परीक्षाओं में 3,212 पदों के लिए 9.4 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. परीक्षा 2019 में हुई थी. जांच में सामने आया कि ओएमआर शीट की जांच के बाद कम्प्यूटर में वास्तविक डाटा से छेड़छाड़ कर चुनिंदा अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ा दिए गए. जिससे अयोग्य अभ्यर्थियों का चयन किया गया. बोर्ड द्वारा मूल OMR शीट की फिर से जांच कराने पर परीक्षा परिणामों में गंभीर विसंगतियां पाई गईं.
जांच में सामने आई चौंकाने वाली बात
- 6 नंबर पाने वाले अभ्यर्थी के नंबर बढ़ाकर 259 कर दिए गए.
- 2 नंबर पाने वाले अभ्यर्थी को 225 नंबर
- 30 नंबर वाले को 185 नंबर दे दिए गए.
- गिरफ्तार अभ्यर्थी पूनम के असली नंबर 63, लेकिन स्कैनिंग के जरिए पूनम के 182 नंबर कर दिए गए.
- आरोपियों ने सिर्फ नंबर नहीं बढ़ाए बल्कि 38 अभ्यर्थियों की OMR शीट ही बदल दी.
नंबर बढ़ाने के बदले लाखों रुपये वसूले जाते थे. इस फर्जीवाड़े की पहली FIR गोमती नगर, लखनऊ में दर्ज हुई थी. आरोपी फर्जीवाड़ी की रकम लेकर उत्तर प्रदेश जा रहे थे. तभी STF ने बीच रास्ते में 60 लाख रुपये नकद के साथ उन्हें पकड़ लिया. इसके बाद जनवरी 2025 में इस पूरे मामले में SOG में FIR दर्ज की गई. फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थी अब SOG की रडार पर हैं. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
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