राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एसओजी का लगातार एक्शन जारी है. जानकारी के अनुसार, राज्यभर में करीब 2000 डमी कैंडिडेट SOG की रडार पर हैं. इन सभी ने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा दी थी और सरकारी नौकरी हासिल करवाने में मदद की. SOG की टीम परीक्षा के रिकॉर्ड को अभी नौकरी कर रहे लोगों के रिकॉर्ड के साथ मिलान कर रही है. संदिग्ध पाए गए लोगों पर एसओजी की टीम जल्द ही शिकंजा कस सकती है.
डमी कैंडिडेट पर चौंकाने वाला आंकड़ा
डमी कैंडिडेट को लेकर जो आंकड़ा सामने आया है, चौंकाने वाला है. बीते पांच साल में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में इन डमी कैंडिडेट ने बैठकर परीक्षा दी थी और सरकारी नौकरी हासिल करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. SOG ने इन सभी को चिन्हित किया है और जल्द अब SOG की टीम इन्हें पकड़ेगी. भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ इस अभियान में लोग आगे आकर एसओजी की मदद कर रहे हैं और हेल्पलाइन के जरिए धांधली की जानकारी एसओजी तक पहुंचा रहे हैं.
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि एसओजी के एक्शन का प्रदेश के लोगों का काफी सहयोग मिल रहा है. लोगों के सहयोग से ही एसओजी को कई अहम जानकारियां मिल रही हैं. उन्होंने बताया कि उनके निजी मोबाइल नंबर पर और एसओजी की हेल्पलाइन पर हर दिन 25-50 जानकारी आ रही है. एसओजी की टीम इन सूचनाओं का लगातार विश्लेषण कर रही है. इनमें करीब दो हजार शिकायतें ऐसी हैं. जिनमें डमी अभ्यर्थी बिठाकर परीक्षा पास करने और नौकरी हासिल करने की बात सामने आई हैं.
रिकॉर्ड की जांच कर रही एसओजी
एसओजी इन अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड विभिन्न एजेंसियों से ले रही है. परीक्षा के रिकॉर्ड की अभी नौकरी कर रहे लोगों के रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है. उनका कहना है कि ऐसे मामले लगातार सामने आने के बाद अब परीक्षा की प्रक्रिया को बदला भी गया है. ताकि परीक्षा में डमी अभ्यर्थी नहीं बैठ पाए. परीक्षा के प्रवेश पत्र भी ऐसे बनाए जा रहे हैं. जिनमें अभ्यर्थी की पूरी जानकारी आती है. लाइव फोटो और बायोमैट्रिक निशान भी लिए जा रहे हैं. एआई के माध्यम से भी पुलिस डमी कैंडिडेट को पकड़ रही है.
जांच में सामने आया कि पिछले पांच साल में कई भर्ती परीक्षा हुई, जिसमें अध्यापक रीट, JEN, अकाउंटेंट, पटवारी, कनिष्ठ अभियंता, सब इंस्पेक्टर सहित कई दर्जनों भर्ती परीक्षा में इन डमी कैंडिडेट ने परीक्षा दी और सरकारी नौकरी हासिल करवाई. गिरोह के माध्यम से ये डमी कैंडिडेट एक्टिव होते हैं और 5-10 लाख रुपये एक परीक्षा में बैठने के लेते हैं. कई केस में ऐसे भी सामने आए, जिसमें परिवार का सदस्य भी इंटेलीजेंट होने के नाते परीक्षा देने जाता है और सरकारी नौकरी हासिल करवाता है.
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