Rajasthan: तालाब के किनारे प्यासा गांव, फाइलों में विकास पर जमीन पर सिर्फ सूखा; बूंद-बूंद पानी के लिए रात-भर जागती हैं महिलाएं 

राजस्थान के झालावाड़ में एक गांव तालाब के पास होकर भी एक-एक बूंद को तरस रहा है. श्री कृष्ण सागर तालाब के पास बसे झिरनिया गांव में बूंद-बूंद पानी के लिए जंग जारी है. महिलाएं दिनभर मटके ढो रही हैं और बच्चों की जान जोखिम में है.

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राजस्थान के झालावाड़ में एक गांव तालाब के पास होकर भी एक-एक बूंद को तरस रहा है

Rajasthan News: राजस्थान के झालावाड़ जिले में विकास के दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था को आईना दिखा रही है. श्री कृष्ण सागर तालाब के बिल्कुल नजदीक बसे झिरनिया गांव के लोग आज के आधुनिक दौर में भी पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. विडंबना यह है कि कागजों में जल जीवन मिशन का टैंक और घर-घर पाइपलाइन बिछी हुई है लेकिन हकीकत में ग्रामीणों के गले सूखे पड़े हैं.

पूरे गांव में बस एक कुआं 

झिरनिया गांव की पूरी आबादी आज केवल एक पुराने कुएं पर टिकी है. सुबह होते ही गांव की महिलाएं और बच्चे सिर पर मटके लेकर कुएं की ओर दौड़ पड़ते हैं. गर्मी के कारण कुएं का जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि अब पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है. हालात इतने बदतर हैं कि महिलाएं अपनी नींद त्यागकर रात के अंधेरे में कुएं पर पानी इकट्ठा होने का इंतजार करती हैं ताकि घर की प्यास बुझ सके.

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शादियों में रोड़ा बनी पानी की किल्लत

पानी का संकट अब गांव के सामाजिक ताने-बाने को भी तोड़ रहा है. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पानी की इस भीषण समस्या के कारण अब लोग यहां अपनी बेटियों का रिश्ता करने से कतराने लगे हैं. "पानी नहीं तो बेटी नहीं" के डर से गांव के कई युवा कुंवारे बैठे हैं. बाहर से आने वाले लोग गांव की बदहाली देखकर पैर पीछे खींच लेते हैं जिससे युवाओं का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है.

स्कूल छोड़ कुएं पर बच्चे, जान का भी खतरा

शिक्षा के मंदिर भी इस किल्लत से अछूते नहीं हैं. गांव के स्कूल में पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चे पढ़ाई छोड़कर कुएं से पानी भरने जाते हैं. सबसे डरावना पहलू यह है कि पानी निकालने के चक्कर में अब तक कई बच्चे कुएं में गिर चुके हैं. अभिभावक हर वक्त किसी बड़ी अनहोनी के डर में रहते हैं लेकिन मजबूरी ऐसी कि बच्चों को भी इस काम में जुटना पड़ता है.

फाइलों में विकास पर जमीन पर सिर्फ सूखा 

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं पर वोट मिलने के बाद कोई पलटकर नहीं देखता. कई बार सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया लेकिन प्रशासन की ओर से सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले. ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव में टैंक और पाइपलाइन का ढांचा तैयार है तो फिर प्रशासन उसमें पानी की सप्लाई क्यों शुरू नहीं कर रहा? अब गांव वालों का सब्र जवाब दे रहा है और वे एक बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं.  

जून-जुलाई पानी आने की संभावना

इस मामले को लेकर जल जीवन मिशन झालावाड़ के अधीक्षण अभियंता अरविंद खींची बताते हैं कि राजगढ़ बांध से यहां पर पानी आना है, तथा काम की जो गति है वह काफी धीमी चल रही है ऐसे में कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि अब वर्तमान स्थितियों के अनुसार अगर आकलन किया जाए तो आगामी जून जुलाई के महीने तक यहां नलों में पानी आने की संभावना है.

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