Bhilwara Unique wedding: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक ऐसी शादी संपन्न हुई जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है. हमीरगढ़ उपखंड के तखतपुर गांव में आम इंसानी शादियों की तरह ही तमाम रस्मों-रिवाजों के साथ गाय के बछड़ा और बछड़ी का 'गो-नंदी' विवाह कराया गया. इस विवाह में न केवल बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़े शामिल थे, बल्कि 21 बैलगाड़ियों में सवार होकर हजारों बाराती भी पहुंचे थे.
बछड़ा- बछड़ी के विवाह में शामिल हुए 100 से अधिक गांवों के लोग
चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा नेशनल हाईवे-48 स्थित श्री छोबावड़ी सगस धाम और रत्नेश्वर महादेव मठ में चल रहे सनातन महोत्सव के दौरान इस अनूठे विवाह का आयोजन किया गया. तखतपुरा की देवनारायण गौशाला में रहने वाले बछड़ा और बछड़ी को इस विवाह के जरिए वैवाहिक सूत्र में बांधा गया. इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए आसपास के 100 से अधिक गांवों के हजारों लोग पहुंचे.

21 बैलगाड़ियों पर निकली बछड़े की बारात
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21 बैलगाड़ियों में निकली भव्य बारात
इस अनोखे विवाह की खुशी लोगों के चेहरों पर देखते ही बन रही थी. इस विवाह में तखतपुरा गांव के चारभुजा नाथ मंदिर से बछड़े (नंदी) की भव्य बारात भी गाजे बाजे के साथ निकाली गई थी. सजे-धजे घोड़ों, डीजे की धुन और ढोल-नगाड़ों के साथ निकली इस बारात का मुख्य आकर्षण 21 सजी हुई बैलगाड़ियां थीं.दूल्हे के रूप में सजे बछड़े को एक विशेष बैलगाड़ी में बैठाकर नेशनल हाईवे मार्ग से होते हुए छोबावड़ी सगस जी धाम लाया गया.
ढोल, बैंड, DJ और सजे-धजे घोड़ों के साथ निकाली बारात
शादी से पहले तख्तपुरा गांव के चारभुजा नाथ मंदिर (बड़ा मंदिर) से एक बड़ी बारात निकाली गई. ढोल, बैंड, DJ और सजे-धजे घोड़ों के साथ बारात में उत्साह का माहौल था. दूल्हे के रूप में सजे बछड़े को खास तौर पर आकर्षक सजावट वाली बैलगाड़ी में बिठाया गया था. करीब 25 बैलगाड़ियां और बड़ी संख्या में पैदल चल रहे बाराती नेशनल हाईवे से अहीर मोहल्ला होते हुए छोबावाड़ी सगस जी धाम शादी करने पहुंचे थे.

बारात में शामिल बाराती
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गाय की सेवा और रक्षा का दिया मजबूत संदेश
मठ की महंत साध्वी देवगिरी ने बताया कि हमीरगढ़ से करीब 3 km दूर तख्तपुरा गांव के गांववालों ने गाय की शादी का शुभ कार्यक्रम रखा था. जिसमें 15 दिन पहले गौशाला में पैदा हुए बछड़े और बछिया की शादी हिंदू रीति-रिवाजों के साथ करवाई गई. इस अनोखे आयोजन ने जहां गांव की संस्कृति और परंपरा को जीवंत किया, वहीं समाज को गाय की सेवा और रक्षा का एक मजबूत संदेश भी दिया.