चिकित्सा मंत्री पर गहलोत का जुबानी हमला, बोले- 'राइट टू हेल्थ बिल' पर खींवसर का बयान निंदनीय

कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने राइट टू हेल्थ को लेकर नियम बनाने संबंधित सवाल पूछा था. इस मामले पर राजस्थान विधानसभा में भी जमकर बहस हुई.

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Rajasthan budget session 2026-27: राजस्थान विधानसभा में 'राइट टू हेल्थ' बिल पर जबरदस्त बहस देखने को मिली. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बीच वार-पलटवार हुआ. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बीजेपी सरकार पर जुबानी हमला बोला है. उन्होंने खींवसर के बयान को निंदनीय बताया. साथ ही कहा कि यह गरीब और मध्यम वर्ग के जख्मों पर नमक के समान है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 'राइट टू हेल्थ' के नियम बनाने में विफल रही है और अब इस तरह की बहानेबाजी कर रही है.

बीजेपी सरकार का सरेंडर- गहलोत 

उन्होंने कहा, "आज विधानसभा में चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र खींवसर का 'राइट टू हेल्थ' पर बयान कि 'इसकी जरूरत ही नहीं है', न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि बढ़ते मेडिकल खर्च से परेशान गरीब एवं मध्यम वर्ग के जख्मों पर नमक के समान है. हमारी कांग्रेस सरकार ने यूनिवर्सल हेल्थकेयर योजनाएं जैसे चिरंजीवी योजना एवं निरोगी राजस्थान योजना लागू होने के बावजूद राइट टू हेल्थ की परिकल्पना की. ताकि किसी भी कारणवश आपातकालीन स्थिति में मरीज इलाज से वंचित न रहे."

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार जनता को महंगे इलाज के खर्च से बचाने का इरादा रखती थी. वहीं, भाजपा सरकार मेडिकल लॉबी के सामने सरेंडर कर राइट टू हेल्थ तक को गलत बता रही है.

कांग्रेस विधायक ने पूछा था सवाल

इससे पहले, गुरुवार (12 फरवरी) को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र खींवसर भिड़ गए. कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने राइट टू हेल्थ को लेकर नियम बनाने संबंधित सवाल पूछा था. गजेंद्र सिंह खींवसर बोले कि नियम बने थे तो आप (कांग्रेस) खिचड़ी क्यों छोड़ कर गए? इस जवाब के बाद विपक्षी नेताओं ने भी तल्ख तेवर दिखाए.

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