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पायलट के मंच पर कांग्रेस के कई गुटों के नेता एक साथ, बांसवाड़ा-डूंगरपुर दौरे के पीछे सचिन का मकसद क्या है?

सचिन पायलट कुशलगढ़ में पूर्व प्रधान हुरतिंग खड़िया की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम में शामिल हुए. इसके साथ ही उन्होंने मेवाड़-वागड़ के कई क्षेत्रों का दौरा किया.

पायलट के मंच पर कांग्रेस के कई गुटों के नेता एक साथ, बांसवाड़ा-डूंगरपुर दौरे के पीछे सचिन का मकसद क्या है?
कुशलगढ़ में कार्यक्रम के दौरान पायलट के साथ कांग्रेस के तमाम नेता एक साथ जुटे.

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट की सक्रियता एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में है. राजस्थान में दो दिन के भीतर 4 जिलों के दौरे पर उन्होंने कई राजनीतिक संदेश दिए. बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सलूंबर और उदयपुर के दौरे में पायलट ने कार्यकर्ताओं से संवाद किया. पायलट ने आदिवासी समाज के बीच मौजूदगी दर्ज कराई, स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव का संदेश दिया और भाजपा पर भी हमले बोले. इस दौरान कांग्रेस के अलग-अलग खेमों के नेता भी पायलट के साथ एक मंच पर नजर आए. अब इसे संगठन की मजबूती की कोशिशों के अलावा मिशन-2028 के लिहाज से भी देखा जा रहा है.   

वागड़ की 9 सीटों पर कांग्रेस के लिए मुश्किलें!

कुशलगढ़ में कांग्रेस विधायक रमीला खड़िया के दिवंगत पति और पूर्व प्रधान हुरतिंग खड़िया की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम में पायलट शामिल हुए. पायलट ने सिर्फ राजनीतिक संदेश नहीं दिए, बल्कि स्थानीय संस्कृति से भी खुद को जोड़ा.  वे कई जगह पारंपरिक आदिवासी साफा और वेशभूषा में नजर आए. त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में दर्शन किए और आदिवासी समाज के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. इस दौरे का सबसे बड़ा फोकस आदिवासी बेल्ट में कांग्रेस की मजबूती की रणनीति है. 

वागड़ की 9 विधानसभा सीटों पर भारत आदिवासी पार्टी यानी बीएपी लगातार मजबूत हुई है, भाजपा भी अपनी पकड़ बढ़ाने में जुटी है. जबकि कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम नहीं है, उसके सामने चुनौती पारंपरिक जनाधार को फिर से मजबूत करने की है.

क्या है जनजाति क्षेत्र का सियासी गणित?

वागड़ क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर समझने के लिए सबसे पहले विधानसभा सीटों का गणित देखना जरूरी है. बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों की कुल 9 विधानसभा सीटों में वर्तमान में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के पास 4 सीटें, कांग्रेस के पास 3 सीटें और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 2 सीटें हैं. यही वजह है कि सचिन पायलट का मेवाड़-वागड़ दौरा राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.

कांग्रेस इस क्षेत्र में भाजपा और BAP, दोनों का तोड़ निकालने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है. कांग्रेस के भीतर भी पायलट की लगातार सक्रियता को भविष्य की रणनीति और संगठन में उनकी भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है.

बीएपी से कांग्रेस के गठबंधन के सवाल पर रखी राय

उन्होंने भाजपा सरकार पर भी आक्रामक रुख अपनाया. अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और केंद्र सरकार से जवाब मांगा. वहीं, छात्रसंघ, पंचायत और नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर राज्य सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि सरकार चुनाव से बच रही है. भारत आदिवासी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन के सवाल पर पायलट ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाता है और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा.

Sachin Pilot

सचिन पायलट का वागड़ क्षेत्र में पहला दौरा था.

मालवीया, बामनिया और रघुवीर मीणा समेत कई नेता दिखे साथ

इस दौरे का एक और बड़ा राजनीतिक संदेश कांग्रेस के भीतर से भी निकला. कुशलगढ़ विधायक रमीला खड़िया के कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एक साथ मंच पर नजर आए. इनमें बांसवाड़ा कांग्रेस जिलाध्यक्ष और विधायक अर्जुन सिंह बामनिया, पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया, विधायक नानालाल निनामा, उदयपुर देहात के जिलाध्यक्ष रघुवीर मीणा, पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा और विधायक अनीता जाटव शामिल रहे. अलग-अलग गुटों के माने जाने वाले नेता जब एक मंच पर जुटे तो इसे कांग्रेस की एकता के तौर पर देखा जा रहा है. 

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