सचिन पायलट का केंद्र पर तीखा हमला, बोले-'भारत की विदेश नीति अमेरिका तय नहीं करेगा' 

राजस्थान में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील, विदेश नीति, टैरिफ, लोकतंत्र और बजट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. 

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राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट.

Rajasthan News: राजस्थान दौरे पर सचिन पायलट ने कहा कि भारत की विदेश नीति किसी दूसरे देश के इशारों पर नहीं चल सकती. उन्होंने साफ कहा कि यह भारत का अधिकार है कि वह किस देश से तेल खरीदेगा. अमेरिका यह तय नहीं कर सकता कि भारत रूस से तेल न खरीदे और वेनेजुएला से खरीदे. यह देश की संप्रभुता से जुड़ा मामला है.

ट्रेड डील और टैरिफ पर हमला

सचिन पायलट ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पहले टैरिफ औसतन 5 से 7 प्रतिशत था जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक किया गया और अब घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है. पायलट ने इसे भारत पर दबाव बनाने की राजनीति बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों में देश के किसानों उद्योगों और आम जनता के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

सीजफायर की घोषणा पर आपत्ति

पायलट ने सवाल उठाया कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर होता है तो इसकी घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति क्यों करते हैं. उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब अमेरिका यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि भारत कहां से तेल खरीदेगा. यह भारत की विदेश नीति में सीधा दखल है.

राहुल गांधी और लोकतंत्र का मुद्दा

सचिन पायलट ने राहुल गांधी के लोकसभा में बोलने पर रोक और उनके परिवार की देशभक्ति पर सवाल उठाने की आलोचना की. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने देश के लिए 32 गोलियां झेली और राजीव गांधी को आतंकवाद ने शहीद किया. ऐसे परिवार की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत और दुर्भाग्यपूर्ण है.

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सुरक्षा सवालों पर सेंसरशिप का आरोप

पायलट ने कहा कि राहुल गांधी जब देश की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाते हैं तो सरकार घबरा जाती है. लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय सेना का मजबूत स्वरूप पंडित नेहरू के समय से तैयार हुआ और आज पूरी दुनिया उसकी ताकत और अनुशासन की तारीफ करती है.

बजट से राजस्थान को निराशा

केंद्र के बजट पर निराशा जताते हुए पायलट ने कहा कि इसमें राजस्थान का नाम तक नहीं लिया गया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अपने बजट में ऐसी योजनाएं लागू करनी चाहिए जो जमीन पर दिखें. सिर्फ घोषणाओं से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता है.

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