Rajasthan Politics: सच‍िन पायलट ने जमीन पर बैठ पत्‍तल में खाई बाजरे की रोटी और म‍िर्ची के टपोरे, चमनपुरा गांव में गुजारी रात 

Rajasthan Politics: कांग्रेस नेता सच‍िन पायलट टोंक ज‍िले के चमनपुरा गांव में रतन बैरवा के घर रात गुजारी. सुबह की शुरुआत चाय और पोहे से की. लोगों ने कहा कहा क‍ि हमने ऐसा नेता नहीं देखा. 

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कांग्रेस नेता सच‍िन पायलट चमनपुरा गांव जमीन पर बैठकर खाना खाया.

Rajasthan Politics:  कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और टोंक से विधायक सचिन पायलट ने बुधवार रात चमनपुरा गांव में चौपाल लगाई. गांव में पूरी रात बि‍ताई. रात को खाने में पायलट ने मिट्टी के चूल्हे पर बनी बाजरे की रोटी और  म‍िर्ची के टपोरे के साथ हरी सब्जी और मालपुआ खाया. NDTV की टीम ने चमनपुरा गांव पंहुचकर सचिन पायलट के साथ ही ग्रामीण महिलाओं और पायलट का स्वागत करने वाले रतन बैरवा से खास बातचीत की.

पायलट ने 7 पंचायतों का दौरा कर जनता से क‍िया संवाद  

राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपनी विधानसभा की बरौनी, हथोंना, पराना सहित 7 पंचायतों का दौरा कर जनता से संवाद क‍िया. चमनपुरा ढाणी में गांव वालों के साथ बैठे. ग्रामीण समस्याओं के साथ ग्रामीण रहन-सहन और सियासी चर्चा की. सर्द रात में चाय की चुस्कियां ली. सुबह गांव में किये सत्कार के लिए पायलट ने ग्रामीण महिलाओं के बीच पंहुचकर उनका आभार जताया, और निकल गए अगले गांव के लिए . 

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सच‍िन पायलट सुबह लोगों से बातचीत की.

"गांव वालों ने आत्‍मीयता से रोटी ख‍िलाई, मैं आभारी हूं" 

NDTV से खास बात करते हुए सचिन पायलट ने गांव में रात कैसी गुजरी के सवाल पर कहा, "बढ़िया गुजरी. गांव के लोगों ने हमारे लिए अपने मकान खोले. हमारा स्वागत सत्कार किया. हमे स्वादिष्ठ खाना खिलाया और क्या चाहिए. हमें आत्मीयता से रोटी खिलाई. मैं बहुत आभारी हूं. मैंने स्वर्गीय राजेश पायलट साहब से यही सीखा है कि इन्ही के लिए हम काम करते हैं, इन्‍हीं के हम वोट लेना चाहते हैं. इनके दुख-दर्द में शामिल होना चाहते हैं."

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"हमें बाजरे की रोटी और मिर्ची की सब्जी खिलाई"

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है जितना हम लोगों के साथ मतदाताओं के साथ संबंध बिताते हैं, उतना ही हमारा लोगों से रिश्ता मजबूत बनता है. यह मेरे लिए कोई नई बात नहीं है. लेकिन, आज रतन बैरवा जी ने हमारे लिये अपने मकान के दरवाजे खोले. वह हमको वहां रहने दिया. हमें बाजरे की रोटी और मिर्ची की सब्जी खिलाई. यह प्यार और आत्मीयता का परिचय है. सब्जी का स्वाद इतना अच्छा था कि मिर्ची की सब्जी में ज्यादा खा गया. अकेले पावभर सब्जी तो मैं ही खा गया." 

मह‍ि‍लाओं ने सच‍िन पायलट को अपनी समस्‍या बताई.

"गांव में समय ब‍िताने पर जुड़ाव बनता है"

वर्तमान परिपेक्ष में आज के नेताओं के नाम संदेश के सवाल पर पायलट ने कहा, "आजकल लोगों का फोकस सोशल मीडिया और रील बनाने में ज्यादा रहता है. ग्रामीण अंचल और लोगों से अगर हम ज्यादा ताल्लुक रखेंगे और सच्चे भाव से समय बिताते हैं तो जुड़ाव बनता है. किसी भी व्यक्ति के लिए जो जनप्रतिनिधि बनना चाहता है, उसके लिए यह जुड़ाव बहुत जरूरी है."

"जाने के बाद जो याद करते हैं वही असली पूंंजी है"  

सचिन पायलट ने कहा, "सियासत में वोट ले लेना या अखबार मीडिया में फोटो छपवा लेना एक अलग बात है, उससे हटकर दुख दर्द बांटने का जो संबंध है, वह बहुत अलग है." सियासत में कटुता और आत्मीयता पर पायलट बोले, "जिसने पब्लिक लाइफ में कटुता रखी है, जिसने शब्‍दों पर नियंत्रण नहीं रखा, वो बहुत ज्यादा लोगों को याद नहीं रहता है. जाने के बाद जो याद रहते हैं, वह भाषा और संबंध है, वही असली पूंजी है." जीवन में मिट्टी के चूल्हे में कितना दम है के सवाल पर हंसते हुए पायलट ने महिलाओं की तरफ देखा ठहाका लगाया और आगे बढ़ गए . 

सच‍िन पायलट बुजुर्गों से बातचीत की.

रतन बैरवा बोले-ऐसा नेता नहीं देखा हम बहुत खुश हैं

रतन बैरवा ने कहा, "ऐसा नेता हमने पहले नहीं देखा. पायलट साहब रात को वह सुबह जनता के बीच बैठे. और जनता से बात की. हमारी समस्याओं को सुना और ग्रामीण जीवन पर लोगों से खुलकर बात की." रतन बैरवा की पत्नी ने कहा, "रात में पायलट साहब के लिए हमने बाजरे कि रोटी और हरी सब्जी के साथ मिर्ची के टपोरे पालक की पकौड़ी और मालपुए बनाये थे, जिन्हें सचिन पायलट ने बड़े चाव से खाया." 

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