'25 साल में बहुत चालें देखी हैं' सचिन पायलट का अशोक गहलोत को बड़ा सियासी संदेश!

बीते कुछ दिन से राजस्थान का सियासी पारा हाई है. कभी गहलोत बनाम शेखावत की अदावत चर्चा में रहती है तो कभी पायलट और गहलोत की लड़ाई प्रदेश के सियासी गलियारों में सुर्खियां पैदा कर देती है. अशोक गहलोत के हालिया बयान के बाद अब सचिन पायलट ने भी बड़ा सियासी संदेश दिया है.

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सचिन पायलट का अशोक गहलोत को बड़ा सियासी संदेश!

राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच अदावत थम नहीं रही है. अब कांग्रेस महासचिव पायलट ने बिना किसी का नाम लिए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयानों के बाद पायलट की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें थीं. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन अपने संबोधन में संयम, राजनीतिक परिपक्वता और जनता की ताकत पर जोर दिया. सचिन पायलट ने कहा कि उन्हें राजनीति में 25 साल हो गए हैं. वह अच्छा-बुरा सब समझते हैं और बहुत से लोगों की चालें भी देख चुके हैं. 

'संयम और संतोष जरूरी है'

दरअसल, कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट बुधवार को करौली आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे. इस दौरान किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि मैं फिर कह रहा हूं, मेरा व्यक्ति का झगड़ा किसी से नहीं और आप सब जानते हो मैं बहुत संभल के बोलता हूं मुंह से जो एक बार बात निकल गई, वापस नहीं आया. इसलिए संघर्ष ज़रूरी है. सच्चाई के साथ खड़ा होना ज़रूरी है और जो ज़रूरी है, संयम ज़रूरी है, संतोष ज़रूरी है, सम्मान देना ज़रूरी है.

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पायलट ने आगे कहा कि हमारी मां बहनें बैठी हैं, जो संस्कार बच्चे को दोगे, वह आप पर निर्भर करता है. दुनिया क्या कहती बोलती है, लेकिन हम अपनी पीढ़ी को शिक्षा के साथ साथ संस्कार देंगे, तभी ये देश सही रास्ते पर चलेगा. वरना मैं देखता हूं आजकल नौजवानों के अंदर जो सोच पैदा हो गई है कोई सुनने को तैयार नहीं है. सबके पास दो दो मोबाइल फ़ोन लेबों में और हर चीज़ के अतिशोध थी.

'मेहनत कभी खराब नहीं जाती'

जीवन में और राजनीति में अनुशासन, संयम और पहली प्राथमिकता देश- प्रदेश की जनता, दूसरी हमारी विचारधारा, हमारी पार्टी. मैं हमेशा से बोलता आया हूँ- अगर कोई मेहनत करके काम करता है तो कोई मेहनत खराब नहीं जाती किसी की.

कांग्रेस महासचिव पायलट ने कहा कि जो लोग राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं, जिनके साथ हमने काम किया है, मैं प्रत्येक व्यक्ति का दिल से और सम्मान करता हूं. हमारे विचारों में अगर मतभेद हो भी सकते हैं, लेकिन मन से कोई मतभेद नहीं है और सच पूछो तो अगर आप किसी की आंख में आंख डालकर देखोगे, आपको पता पड़ जाएगा कि वो सच बोल रहा है, झूठ बोल रहा है और मैं हमेशा बोल पाया हूं.

संबोधन के दौरान भावुक हुए पायलट

अपने संबोधन के समय सचिन पायलट भावुक भी नजर आए. उन्होंने अपने पिता राजेश पायलट को याद करते हुए कहा कि 11 जून 2000 को परिवार ने एक बड़ा सहारा खो दिया था. उन्होंने बताया कि राजेश पायलट की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम कई वर्षों से लंबित था, लेकिन क्षेत्र की जनता और 36 कौम के लोगों की इच्छा के चलते आखिरकार यह आयोजन संभव हो सका. पायलट ने कहा कि जनता का प्यार और समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है.

उन्होंने पिता राजेश पायलट को याद करते हुए कहा कि 90 के दशक में देश के चर्चित तांत्रिक चंद्रास्वामी का इतना प्रभाव था कि बड़े-बड़े नेता उनका नाम लेने से भी डरते थे, लेकिन राजेश पायलट ने उनके तिलिस्म को तोड़ा और उन्हें कानून के दायरे में लाने का काम किया. पायलट ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति को सच और सिद्धांतों के साथ खड़ा होना चाहिए. डर या दबाव के बजाय जनहित और सच्चाई के लिए संघर्ष करना ही राजनीति का मूल उद्देश्य होना चाहिए.

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