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Rajasthan: '40 साल कांग्रेस को जेब में रखकर चले अशोक गहलोत', पूर्व OSD लोकेश शर्मा बोले- अब वो जेब फट गई है

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव और राजस्थान के सियासी ड्रामे पर पूर्व ओएसडी ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने उन बातों को सामने रखा है जो बंद कमरों में पूर्व सीएम के साथ हुई थीं. उन्होंने यह भी बताया है कि असल में दिल्ली जाने को लेकर अशोक गहलोत के मन में क्या हिचकिचाहट थी. पढ़ें पूरी खबर...

Rajasthan: '40 साल कांग्रेस को जेब में रखकर चले अशोक गहलोत', पूर्व OSD लोकेश शर्मा बोले- अब वो जेब फट गई है
पूर्व OSD ने बताया क्यों दिल्ली जाने से कतरा रहे थे गहलोत, बोले- 40 साल पुरानी जेब अब फट चुकी है!
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Jaipur News: राजस्थान की सियासत में 'जादूगर' के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) इस समय अपनी ही पार्टी के भीतर चौतरफा घिर गए हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव न लड़ पाने के पीछे 'साजिश' वाले उनके बयान पर अब उनके अपने ही पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा (Lokesh Sharma) ने पलटवार किया है. लोकेश शर्मा ने साफ लफ्जों में कहा कि गहलोत सरासर झूठ बोल रहे हैं, उनके खिलाफ किसी ने कोई साजिश नहीं रची थी, बल्कि वे खुद दिल्ली जाने से डर रहे थे और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ना नहीं चाहते थे.

'मुझे दिल्ली का सिस्टम समझ नहीं आता'

IANS को दिए एक इंटरव्यू में लोकेश शर्मा ने बताया कि जब कांग्रेस आलाकमान ने अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का पूरा मन बना लिया था, तब गहलोत खुद इस जिम्मेदारी से भाग रहे थे. बंद कमरों में बातचीत के दौरान गहलोत अक्सर कहते थे, 'लोकेश, मुझे दिल्ली का सिस्टम समझ नहीं आता. वहां का पूरा ढांचा संभालना मेरे बस की बात नहीं है. राजस्थान मेरी रग-रग में बसा है और मैं यहीं रहकर काम करना चाहता हूं.'

'कुर्सी छोड़ने का डर था और समीक्षा की चिंता'

पूर्व ओएसडी के मुताबिक, अशोक गहलोत को सबसे बड़ा डर इस बात का था कि अगर वे दिल्ली चले गए और राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई दूसरा नेता बैठ गया, तो उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों और अलग-अलग मामलों की जांच शुरू हो सकती है. इसी डर के चलते उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में जाने से पूरी तरह परहेज किया. इसीलिए उनकी कभी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की इच्छा ही नहीं थी. वह बस यह मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ना नहीं चाहते थे.

'25 सितंबर का घटनाक्रम दबाव की राजनीति थी'

लोकेश शर्मा ने कहा कि अशोक गहलोत हमेशा दबाव की राजनीति करते हैं और 25 सितंबर 2022 की घटना भी उसी रणनीति का हिस्सा थी. यह हाईकमान पर यह दिखाने के लिए दबाव बनाना था कि कितने विधायक उनके साथ हैं. उस दिन दिल्ली से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन पर्यवेक्षक के तौर पर जयपुर आए थे. उनके सामने जो स्थिति बनी, वह आलाकमान को चुनौती देने जैसा माहौल था. विधायक मुख्यमंत्री निवास के बजाय शांति धारीवाल के आवास पर इकट्ठा हुए और फिर विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी को सामूहिक इस्तीफे सौंपे, ताकि पर्यवेक्षक विधायकों से व्यक्तिगत बातचीत न कर सकें.

'कांग्रेस के इतिहास में जो कभी नहीं हुआ, वो गहलोत ने किया'

शर्मा ने कहा कि गहलोत ने सीधे तौर पर हाईकमान और कांग्रेस पार्टी को साजिशकर्ता कहा है, जिससे ज्यादा निंदनीय काम कोई और नहीं हो सकता. इतिहास में किसी भी कांग्रेस पदाधिकारी या मुख्यमंत्री ने सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी को इस तरह सीधे तौर पर साजिशकर्ता नहीं कहा है. उन्होंने कहा कि अगर गहलोत स्वयं को जननायक मानते हैं तो उन्हें पार्टी से अलग होकर अपनी राजनीतिक ताकत का परीक्षण करना चाहिए, उन्हें धरातल का पता चल जाएगा.

'कंट्रोल हाथों से रेत की तरह फिसल रहा है'

लोकेश शर्मा ने कहा कि अब हाईकमान को असलियत पता चल गई है कि अशोक गहलोत ने क्या किया है और कैसे उन्होंने नेतृत्व के आदेशों को नहीं माना, इसीलिए आलाकमान अब उनसे बात नहीं कर रहा है. गहलोत के बयान उनकी हताशा और गुस्सा हैं, क्योंकि उन्हें एहसास हो गया है कि पिछले 40 सालों से उन्होंने जिस तरह राजस्थान में कांग्रेस पर अपना दबदबा बनाए रखा और उसे अपनी जेब में रखा, वह जेब अब फट गई है. वह कंट्रोल उनके हाथों से रेत की तरह फिसल रहा है.

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