सऊदी अरब में अब ऐसे ही नहीं लिख सकते 'अल्लाह' का नाम, सरकार ने किया बैन

क़ुरान तथा इस्लामी परंपरा में अल्लाह के 99 नामों का उल्लेख है जिन्हें बहुत पवित्र माना जाता है.

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सऊदी अरब के मक्का में पूरी दुनिया के मुस्लिम श्रद्धालु हज करने जाते हैं
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सऊदी अरब की मुस्लिम जगत में एक ख़ास पहचान है. इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल मक्का सऊदी अरब में ही है. लेकिन, सऊदी अरब की सरकार का मानना है कि कई लोग वहां फायदे के लिए धर्म के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए अब वहां की सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. सऊदी सरकार ने व्यावसायिक कंपनियों और दुकानों आदि के अल्लाह के नामों को ऐसे लिखने पर रोक लगा दी है जिससे इन पवित्र नामों का अपमान हो सकता है. इस आदेश के बाद अल्लाह के नामों को ऐसी चीज़ों पर लिखना बैन हो गया है जिन्हें नष्ट किया जा सकता है या जिनका अनुचित इस्तेमाल हो सकता है.

सऊदी सरकार का बयान

इस फैसले का ऐलान सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्रालय की ओर से किया गया. मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अब्दुलरहमान अल हुसैन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी जानकारी दी है. प्रवक्ता ने कहा कि यह क़दम धार्मिक आस्था को महफूज़ रखने के इरादे से उठाया गया है. 

अल हुसैन ने एक बयान में लिखा है कि सऊदी अरब अल्लाह के पवित्र नामों के सम्मान और उनकी रक्षा करने को लेकर प्रतिबद्ध है, जिन्हें इस्लाम में 'अल अस्मां उल हुस्ना' कहा जाता है. क़ुरान तथा इस्लामी परंपरा में अल्लाह के 99 नामों का उल्लेख है जिन्हें बहुत पवित्र माना जाता है.

सऊदी वाणिज्य मंत्रालय का बयान
Photo Credit: @MCgovSA

किन सामानों पर लगाया गया बैन?

बयान में कहा गया है,"इन नामों का बहुत आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है, और यह ज़रूरी है कि उन्हें ऐसी चीज़ों पर नहीं लिखा जाए जिन्हें ठीक से संभाला नहीं जा सकता, नष्ट किया जा सकता है, या इस प्रकार से इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे उनकी पवित्रता के साथ समझौता होता हो."

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सऊदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये पाबंदियां हर तरह के व्यावसायिक इस्तेमाल पर लागू होती हैं. इनमें प्रिंटेड बैग, सामानों के पैकेट और प्रचार सामग्रियां शामिल हैं. इनमें ख़ास तौर पर ऐसे सामान शामिल हैं जो कम समय के लिए इस्तेमाल होते हैं या जिन्हें डिस्पोज कर दिया जाता है.

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